महाराष्ट्र में जारी मराठा आरक्षण आंदोलन अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिख रहा है। मुंबई में आजाद मैदान में मराठाओं को आरक्षण दिलाने के लिए अनशन पर बैठे मनोज जरांगे ने सरकारी प्रतिनिधिमंडल के ऑफर के बाद प्रदर्शनकारियों से कहा कि वो जीत गए हैं। कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार को अनिश्चितकालीन अनशन के पांचवें दिन अपनी अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिए जाने के बाद जीत की घोषणा की जिससे यहां उनके समर्थकों में जश्न का माहौल है। मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र सरकार की मंत्रिमंडलीय उप-समिति द्वारा जिन मांगों को स्वीकार किया गया है उनमें पात्र मराठों को कुनबी जाति का होने का प्रमाण पत्र देना भी शामिल है।
सरकार ने जारी किया आदेश तो छोड़ देंगे मुंबई
विखे पाटिल ने समिति के अन्य सदस्यों - शिवेन्द्रसिंह भोसले, उदय सामंत, माणिकराव कोकाटे - के साथ दोपहर में दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में जरांगे से मुलाकात की और समिति द्वारा अंतिम रूप दिए गए मसौदे पर उनके साथ चर्चा की। आजाद मैदान में ही आरक्षण की मांग को लेकर मराठा कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर हैं। जरांगे ने कहा, “अगर महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण की मांग पर सरकारी आदेश (जीआर) जारी करती है तो हम आज रात नौ बजे तक मुंबई छोड़ देंगे।”
मांगों पर सरकार का ऑफर
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा- सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने मुझे जो बताया है, मैं उसे आपको पढ़कर सुना रहा हूं... यदि आप (प्रदर्शनकारी) इन बिंदुओं से सहमत हैं, तो हम सरकार को अपने निर्णय से अवगत कराएंगे।
1. पहली मांग
- हैदराबाद गजट को तुरंत लागू करें
- इस मांग पर, उप-समिति ने निर्णय लिया है कि हैदराबाद गजट लागू कर दिया गया है।
2. सतारा गजट को लागू करने की मांग पर
- इस मांग के संबंध में, कानूनी पहलुओं की जांच के बाद इसे लागू किया जाएगा। वर्तमान में, कुछ कानूनी कमियां हैं जिनका अध्ययन किया जाएगा।
3. मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज मामले
- मराठा आंदोलन के दौरान गंभीर मामलों को छोड़कर, सरकार मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों को वापस लेने पर सहमत हो गई है।
4. जान गंवाने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों को आर्थिक मदद
- मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
5. मराठों को कुनबी वर्ग में शामिल करने के लिए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करने की मांग पर
- सरकार ने कहा है कि यह एक जटिल मुद्दा है। सरकार दो महीने का समय मांग रही है। हमें समय देने पर विचार करना चाहिए।
6. रिश्तेदारों (विस्तारित परिवार) को आरक्षण देने की मांग पर
- सरकार का कहना है कि यह एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है। इसमें समय लगेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने क्या कहा
विखे पाटिल ने कहा कि ‘सेज सोयारे’ (रक्त संबंधियों) अधिसूचना पर आठ लाख आपत्तियां प्राप्त हुई हैं और सरकार को उनकी जांच के लिए समय चाहिए। मंत्री ने कहा कि सरकार यह कहते हुए जीआर जारी करने के लिए कानूनी विकल्प भी तलाश रही है कि कुनबी और मराठा एक ही समुदाय हैं, और इस प्रक्रिया में दो महीने लगेंगे।
जश्न का माहौल
जरांगे की जीत की घोषणा के बाद, आजाद मैदान और उसके आसपास मराठा आरक्षण प्रदर्शनकारियों के बीच जश्न का माहौल बन गया। जरांगे ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समूह के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी।
