जुमे की नमाज के बाद हिंसा: 'भड़काऊ गैंग' को ओवैसी-मदनी का बैकअप?

जुमे की नमाज के बाद बवाल करने वालों के पीछे असदुद्दीन ओवैसी और मदनी जैसे नेता और मुस्लिम धर्मगुरु तौकीर रजा जैसे लोगों का हाथ है?  हमारी एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट जानिए।

Violence after Friday prayers: Owaisi-Madani's backup to Inflammatory Gang
ओवैसी और मदनी के इसाले पर हुई हिंसा? 

शुक्रवार को देशभर में मचे उपद्रव की इनसाइड स्टोरी की। तमाम राज्यों की पुलिस जुमे की नमाज के बाद बवाल करने वालों पर एक्शन में जुटी है। बावजूद इसके उकसाऊ बयानबाजी रुकने का नाम नहीं ले रही है।आज एक बार फिर मुस्लिम धर्मगुरु तौकीर रजा की भड़काऊ तकरीर सामने आई। इससे पहले मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सुहैब कासमी ने बाकायदा ओवैसी और मदनी जैसे नेताओं के नाम लेकर उन पर उपद्रव के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। ऐसे में सवाल ये कि बीजेपी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद क्या वाकई हिंसा को जानबूझकर भड़काया गया? संविधान को ताक पर रखकर 'सर तन से जुदा' जैसी नफरत भरी नारेबाजी की गई? इसे समझने के लिए देखिए हमारी ये एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट..

ये कैसा मंजर है? दुनिया के सबसे विशाल लोकतंत्र की ये कैसी बदनुमा तस्वीर है? जहां संविधान सर्वोपरि है..जहां हर इंसान और मजहब बराबर हैं। वहां बीजेपी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के आपत्तिजनक बयान के दो हफ्ते बाद शहर-शहर ऐसा भीड़तंत्र क्यों? सरेआम सर काटने की गैरकानूनी धमकी क्यों?  प्रशासन को चाहिए जो अजान के खिलाफ बोले उनका गला पकड़े । जो पर्दे के खिलाफ बोले उनका गला पकड़े । ये गला नहीं पकड़ सकते तो हम गला काटने के लिए तैयार हैं । हम गला काटने के लिए तैयार हैं और इनको मैं बताना चाहता हूं । सबसे ज्यादा कम दर्जे का मुसलमान इतना ईमान रखता है दुनिया के किसी भी ब्रिगेडियर, किसी भी ताकतवर गुस्ताख का सिर कलम कर सके 

बीते जुमे की नमाज के बाद देश के कई प्रदेशों में जिन लोगों ने कानून को हाथ में लिया..आगजनी की..पथराव किया..उन पर अब एक्शन भी जारी है..कानून अपना काम कर रहा है लेकिन ये किसी को भी किसी सूरत में नहीं भूलना चाहिए कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई बिना भेदभाव के होती है..फिर वो चाहे आस्था को अपमानित करने की गुस्ताखी हो या फिर विरोध में कानून का माखौल उड़ाने वाली भीड़.. लेकिन सवाल ये कि बीजेपी नेता नूपुर शर्मा की गलतबयानी के 2 हफ्ते बाद भड़की हिंसा की आग क्या वाकई सोची-समझी साजिश का नतीजा थी..इसके लिए क्या वाकई वो भड़काऊ तकरीरें जिम्मेदार हैं..जो हाल के दिनों में चंद नेताओं की तरफ से दी गईं..

उन आकाओं ने जो भारत की दुनिया में बढ़ती हुई छवि, संबंध और हमारी सरकार के अरब देशों से और इस्लामिक देशों से ताल्लुकात पर जल भी रहे हैं और गमजदा भी हैं। अपने एजेंडे के तहत भारत के अंदर जगह-जगह दंगे करवा रहे हैं। उन दंगों को लीड करने के लिए जो तंजीमें उनको भड़का रही थीं। मदनी जैसे लोग, जो कह रहे थे कि हिंदू इस देश को छोड़कर चले जाएं। मदनी जैसे लोग जो घड़ियाली आंसू बहा रहे थे। ओवैसी जैसे लोग जो सर में सफेद कपड़ा बांधकर घूम रहे थे। वो कानपुर के इमाम जो कह रहे थे कि कफन बांधकर हम निकलेंगे। कफन बांधकर हम ईंट से ईंट बजा देंगे। हम गर्दनें काट लेंगे और रसूल की गुस्ताखी की एक ही सजा..सर तन से जुदा..सर तन से जुदा..जो सारे के सारे गायब हो गए..और बीस-बीस साल के बच्चों को सड़कों पर छोड़ दिया..सरकार से लड़ने के लिए..पुलिस से लड़ने के लिए और सिस्टम से लड़ने के लिए..

ये जमात उलमा ए हिंद के चेयरमैन मौलाना सुहैब कासमी हैं। जो सीधे तौर पर ओवैसी और मदनी जैसे नेताओं को जुमे की हिंसा के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। इनके आरोपों पर दूसरे पक्ष का जवाब आना बाकी है लेकिन सवाल बेहद गंभीर है कि संविधान से चलने वाले देश में सर तन से जुदा करने जैसी धमकी क्यों? इसे लेकर हमने देश से विदेश तक उन लोगों से बात की..जिनका जितना यकीन मजहबी किताबों में है..उतना ही भरोसा भारत के संविधान पर भी है..उन लोगों की बातें आपको सुनाएंगे..लेकिन उससे पहले जरा AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की वो तकरीर सुनिए..जो उन्होंने इसी महीने की 7 तारीख को महाराष्ट्र के लातूर में दी।

सब लोग आकर बोलेंगे ओवैसी भड़काऊ भाषण देता है..ओवैसी जज्बाती तकरीर करता है..मैं जो कुछ कह रहा हूं अभी और कहूंगा..उसमें बताओ..उसमें क्या सच्चाई है या झूठ है..मुझे बताओ..तुम सिर्फ सच्चाई को कबूल करने के लिए तैयार नहीं हो..तुम मुझसे नफरत इसलिए करते हो कि तुम नहीं चाहते कि भारत का मुसलमान एक सियासी कुव्वत बन जाए..तुम मुझसे नफरत इसलिए करते हो कि तुम नहीं चाहते कि गरीब मुसलमान को इंसाफ मिले..तुम मुझको गालियां इसलिए देते हो..ताकि तुम नहीं चाहते कि मुसलमान पढ़-लिख कर उसके मुंह में जबान आ जाए और वो अपने इंसाफ के लिए खड़ा हो जाए..तुम मेरे जिस्म पर गोलियां इसलिए चलाई तुमने..ताकि तुम नहीं चाहते कि मैं जिंदा रहूं और गरीब और मजलूमों की दास्तां को इंसाफ का बयां करूं..मगर सुन लो गोली मारने वालों..सुन लो मेरे दुश्मनों मैं मरने के लिए तैयार हूं..क्या तुम मरने के लिए तैयार हो?

विदेश से वकालत की पढ़ाई करने वाले..अपनी दलीलों से विरोधियों की बोलती बंद कर देने वाले..हैदराबाद से लगातार 4 बार के सांसद ओवैसी जैसी शख्सियत जब मरने और मारने जैसी बात करेगी..तो उन पर आंख मूंद कर यकीन करने वालों पर कैसा असर होगा? अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है..अब आपको जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी की तकरीर भी सुनाते हैं..जो उन्होंने बीते मई के महीने में की थी।

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