Uniform civil code: एक बार फिर समान नागरिक संहिता चर्चा में, लेफ्ट दलों के सांसदों को है विरोध

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 24, 2021, 04:54 PM IST

समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर लेफ्ट दलों का कहना है कि इसके जरिए केंद्र सरकार संघ के एजेंडे को लागू करने के फिराक में है।

देश में समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर अलग अलग नजरिया है। बीजेपी के मुताबिक देश के हर नागरिक के लिए समान नियम कानून होने चाहिए जो विकास में सहायक होगा। लेकिन विपक्ष का कहना है कि इसके जरिए संघ के एजेंडे को लागू किया जा रहा है जिसका पूरजोर विरोध है। यूसीसी के संबंध में प्राइवेट मेंबर बिल के लाए जाने के विरोध नें सीपीआई- एम सांसद एलामरम करीम, डॉ वी सिवदासन और सीपीआई एमपी विनोय विस्वन ने रूल 67 के तहत नोटिस भेजा है। 

यूसीसी पर प्राइवेट बिल
अब सवाल यह है कि जब संविधान में यूसीसी का जिक्र है तो इसका विरोध क्यो हैं, क्या सिर्फ राजनीतिक वजह से इसका विरोध किया जा रहा है। इसके जवाब में जानकार क्या कहते हैं इसे समझना जरूरी है। दरअसल अनुच्छेद 44 डीपीएसपी का हिस्सा है इसे लागू करने के लिए कोई अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता है। हालांकि सरकार को संसद के जरिए इसमें बदलाव करने का अधिकार है। अब इसे लेकर सत्ता और विपक्ष में सैद्धांतिक मतभेद है लेकिन कहीं ना कहीं वोटों की राजनीति भी है।

पक्ष- विपक्ष दोनों की कवायद सांकेतिक
बीजेपी को लगता है कि अब समय आ चुका है कि एक समान व्यवस्था के तहत हर किसी को लाए जाए। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इसके जरिए संवैधानिक बुनियाद को कमजोर की कोशिश कर रही है। अगर आप लेफ्ट दलों के कुछ सांसदों के विरोध को देखें तो उसका कोई खास अर्थ नहीं रह जाता है क्योंकि इस बिल को सरकार की तरफ से नहीं पेश किया जा रहा है बल्कि प्राइवेट बिल के तौर पर लाया जा रहा है। इसलिए इसे सत्ता और विपक्ष के विरोध को सांकेतिक माना जा सकता है। 

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