चीन की सबसे बड़ी साजिश में लेफ्ट भागीदार था? लेफ्ट-कांग्रेस ने क्यों टेके घुटने?

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले की किताब से ऐसे-ऐसे खुलासे हुए हैं जिनसे वामदलों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। इससे सामने आया है कि चीन ने भारत-अमेरिका की न्यूक्लियर डील को रोकने के लिए लेफ्ट दलों का इस्तेमाल किया।

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चीन के साथ लेफ्ट की जुगलबंदी का राज क्या? 

हमारे देश की कुछ राजनीतिक पार्टियां खाती तो हिंदुस्तान का हैं लेकिन अपने स्वार्थ के लिए चीन-पाकिस्तान का गुणगान करती हैं या बंद दरवाजे के पीछे चीन जैसे देशों से डील करती हैं। इन राजनीतिक पार्टियों का मकसद देशहित है या नहीं आप खुद जानते हैं। ऐसे ही बंद दरवाजे के पीछे गुप्त डील करने वाले अब बेनकाब भी हो रहे हैं। पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले की किताब में जो खुलासे हुए हैं वो चौकाने वाले है। गोखले ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील को रोकने के लिए चीन ने वामदलों को अपना हथियार बनाया। मतलब चीन और वामदल मिलकर इस डील को रोकना चाहते थे। अब लेफ्ट पार्टियां इसे गलत बताने में लगी है लेकिन चंद दिन पहले ही चीन के वेबिनार में लेफ्ट पार्टियों की मौजूदगी थी। लेफ्ट पार्टियां ही नहीं कांग्रेस और चीन के बीच भी गुफ्त डील के बारे में आप जानते ही होंगे। सवाल है क्या चीन की सबसे बड़ी साजिश में लेफ्ट भागीदार था? सवाल ये भी है कि चीन की 'चरण वंदना' के लिए कांग्रेस और लेफ्ट ने घुटने टेक दिए। 

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने हाल ही में रिलीज अपनी नई किताब में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर दावा किया है कि इसके विरोध के लिए चीन ने कम्युनिस्ट पार्टियों का इस्तेमाल किया था। अपनी नई किताब द लॉन्ग गेमः हाऊ द चाइनीज निगोशिएट विद इंडिया में गोखले ने लिखा है कि साल 2007-2008 में भारत अमेरिका न्यूक्लियर डील के दौरान तत्कालीन पीएम डॉ. मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में लेफ्ट पार्टियों के प्रभाव को देखते हुए चीन ने शायद अमेरिका के प्रति भारत के झुकाव के बारे में उनके डर का इस्तेमाल किया। भारत की घरेलू राजनीति में चीन के दखल का ये पहला उदाहरण है।  

इतना ही नहीं गोखले ने अपनी किताब में जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर का भी जिक्र किया है कि कैसे चीन ने मसूद का इस्तेमाल किया है। चंद दिन पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल पूरे होने पर वेबिनार में लेफ्ट पार्टी के कई नेता शामिल हुए थे। इस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति भी जताई थी। लेफ्ट ही नहीं कांग्रेस भी हमेशा चीन के प्रति नरम रही है। सोनिया गांधी के राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन डोनेशन देता रहा है। इतना ही नहीं 2017-18 में राहुल गांधी के चीनी राजदूत के साथ गुप्त मीटिंग की बात भी सामने आई थी। बिना सरकार को बताए राहुल ने क्यों गुप्त मुलाकात की, ये आज भी सवाल ही बना हुआ है। सवाल है जो चीन बार बार भारत के खिलाफ साजिश रचता रहा है उस चीन के साथ सांठगांठ क्यों? क्या देश के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश में वामदल और कांग्रेस भागीदार हैं? सवाल ये भी है कि चीन के आगे लेफ्ट दलों और कांग्रेस ने क्यों घुटने टेके हैं?

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