Sawal Public ka: क्या महाराष्ट्र में भी 'दिल्ली दंगे' जैसी साजिश रची गई? क्या टूलकिट बनाकर महाराष्ट्र में दंगा भड़काया गया?

Sawal Public ka: 12 नवंबर को महाराष्ट्र के 5 शहरों में जबरदस्त हिंसा हई थी। आगजनी और तोड़फोड़ हुई, जिसके बाद आज भी वहां तनाव है। हम आपको बताएंगे कि महाराष्ट्र की हिंसा में किस तरह त्रिपुरा की टूलकिट का इस्तेमाल किया गया था।

sawal public ka
सवाल पब्लिक का 

महाराष्ट्र में दंगा कैसे भड़का? इसका एक टूलकिट TIMES NOW नवभारत को अपने सोर्स से मिला है। दंगा भड़काने वाले इस टूलकिट में क्या है? कैसे त्रिपुरा से करीब 2700 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र को दंगे की आग में जलाने की कोशिश हुई। कैसे प्लानिंग हुई, कैसे उसे लागू किया गया, ये सवाल पब्लिक का में बताया गया।

टूलकिट से महाराष्ट्र के तीन शहर अमरावती,नांदेड़ और मालेगांव में दंगे कराए गए। साजिश के तहत पहले फेक न्यूज फैलाई गई। सबूत भी सामने आए हैं। अख्तरुल इमाम ने 29 अक्टूबर को फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि बजरंग दल के गुंडों द्वारा त्रिपुरा में मुसलमानों को और उनके घरों, इबादतगाहों और दुकानों को नजर-ए-आतिश किया जा रहा है। सरकार पूरी तरीके से कानून के पालन करने में फेल नजर आ रही है। उसी दिन यानी 29 अक्टूबर को डीजीपी विजय सिंह यादव को कोट कर खबर छपी कि मस्जिदों को जलाने की खबर पूरी तरह झूठ है। अख्तरुल इमान ने जो लिखा उसे मराठी मुसलमान नाम के पेज से लोकल लैग्वेंज में शेयर किया गया।

इसके अलावा मोहम्मद सलमान ने ट्विटर पर लिखा कि त्रिपुरा के पाल बाजार में हिंदुत्व के गुंडों ने मस्जिद में आग लगा दी। मोहम्मद सलमान ने भड़काउ वीडियो ट्वीट किया और त्रिपुरा पुलिस की तरफ से मीडिया को ये कहा गया कि मस्जिद में आग की खबर झूठ है। जिसने ऐसा किया है उस पर एक्शन लेंगे।  

ऐसे एक दो नहीं कई एग्जामपल हैं। एक तस्वीर शेयर की गई जिसमें एक युवक के हाथ में अधजली किताबें हैं। सोशल मीडिया पर ये झूठ फैलाया गया कि ये पवित्र कुरान है। जबकि हकीकत ये है कि ये रोहिंग्या कैंप में घर में आग लगने से जल गई पवित्र किताबें हैं। त्रिपुरा से इसका कोई ताल्लुक नहीं। सबूत देखकर लगता है कि लोकल लेवल पर यूट्यूब चैनल्स ने दंगा फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। ट्विटर पर ऐसे हैशटैग चलाए गए जिससे लोगों का ध्यान जाए । अब सवाल ये है कि इस पूरे मामले में रजा एकेडमी का नाम कैसे आया। दरअसल वसीम रिजवी की एक किताब जिसके रिलीज के मौके पर स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती भी मौजूद दिखे। महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में वसीम रिजवी की किताब को लेकर प्रोटेस्ट हुए। रजा अकेडमी की तरफ से इसे बैन करने की अपील हुई। महाराष्ट्र के कई शहरों में बंद कॉल हुए। इसी दौरान त्रिपुरा की फेक न्यूज भी फैली। जिस समय महाराष्ट्र में हिंसा फैल चुकी थी उस समय एक मीटिंग हुई जिसमें AICC महासचिव तारिक अनवर के साथ रजा एकेडमी के हेड मोइन मियां भी हैं। सवाल सिर्फ रजा एकेडमी पर नहीं। सवाल ये भी है कि क्या राहुल गांधी, तेजस्वी यादव जैसों के ट्वीट से त्रिपुरा को लेकर फैलने वाली फेक न्यूज को बल मिला। क्या विपक्ष के दूसरे नेताओं ने बिना फैक्ट की जांच के बयान जारी किया। इन सबकी जांच की जरूरत है।

सवाल पब्लिक का में सवाल पूछे गए:

  1. क्या महाराष्ट्र में भी 'दिल्ली दंगे' जैसी साजिश रची गई?
  2. क्या टूलकिट बनाकर महाराष्ट्र में दंगा भड़काया गया? 
  3. अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का झूठा प्रचार कब तक?

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