Rashtravad: भारत में सेक्युलरिज्म का दिखावा, तालिबान का शरिया क्यों भाया?

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 9, 2021, 06:56 PM IST

Rashtravad: राष्ट्रवाद में बहस हुई कि आखिर क्यों हमारे देश के कुछ राजनेता तालिबान के पक्ष में बयान दे रहे हैं। वो भारत में सेक्युलरिज्म का दिखावा करते हैं और तालिबान का शरिया उन्हें भा रहा है।

'राष्ट्रवाद...देश से बढ़कर कुछ नहीं' में बात हुई तालिबान को लेकर महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के बयान पर। भारत में सेक्लुरिज्म का रोना रोने वाले कुछ दल तालिबानी सरकार का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। पहले पाकिस्तान परस्ती और अब तालिबान की आतंकी सरकार के शरिया कानून का समर्थन हो रहा है। महबूबा मुफ्ती और फारूक अबदुल्ला तालिबान की आतंकी सरकार को बता रहे हैं कि उन्हें कैसे सरकार चलानी है। भारत में सेक्युलरिज्म की दुहाई देने वाले इन नेताओं का असली नकाब उतर चुका है। ये कह रहे हैं कि तालिबान शरिया कानून और इस्लामी उसूलों से सरकार चलाए। 

महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला के बयान से इनकी कट्टरवादी तालिबानी सोच साफ दिखाई देती है। तालिबान का समर्थन करने वाले इन नेताओं पर बीजेपी ने करारा हमला बोला है। अफगानिस्तान में तालिबानी राज होने के बाद महिलाओं के ऊपर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गईं। महिलाओं से कई हक छीन लिए गए, जिनके लिए आज वो सड़क पर उतरकर लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाएं ही नहीं तालिबान पत्रकारों का दुश्मन बन गया है। पत्रकारों को पीटा गया है, कोड़े बरसाए गए हैं। ये है तालिबान जो इंसानियत का दुश्मन है। भले ही तालिबान बड़ी बड़ी बातें कर रहा हो लेकिन सच्चाई अलग है।

वहीं, दूसरी ओर अब तालिबान का सगा पाकिस्तान भी उसी की राह पर चल पड़ा है। पड़ोसी मुल्क ने भी अब तालिबान की ही तरह महिलाओं पर कई तरह की रोक लगा दी हैं। पाकिस्तान की संघीय शिक्षा निदेशालय यानी FDE ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा पुरुषों के भी जींस पहनने पर रोक लगा दी गई है। हमारे देश में महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता तालिबान सरकार का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि सवालों से घिरी महबूबा अब अपने बयान पर सफाई देने की कोशिश की। महबूबा ने बयान को तोड़परोड़कर पेश करने का आरोप लगाया लेकिन एक और विवादित बयान दे दिया। महबूबा ने कहा कि भारत में पूरी तरह ध्रुवीकरण  हो चुका है और इस्लामोफोबिया काफी बढ़ गया है। मुस्लिमों से अक्सर उम्मीद की जाती है कि वो हर बार हिंसा के साथ न खड़े होने का सबूत दें।

ऐसे में सवाल है 

  1. काबुल में आतंकी सरकार, तालिबान परस्त 'गुपकार'?
  2. महबूबा-अबदुल्ला को चाहिए 'शरिया' वाली सरकार?
  3. भारत में सेक्युलरिज्म का दिखावा, तालिबान का शरिया क्यों भाया?
  4. काबुल में कब्जे वाली साजिश, कश्मीर में चाहिए मौका?
     
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