PM मोदी को महज हिंदू धर्म से जोड़ना कितना सही? सोमनाथ टू केदारनाथ...मोदी सरकार के कार्यकाल में क्‍या कुछ बदला, देखिये Sawal Public Ka

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केदारनाथ के दर्शन किए और आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्‍होंने यहां कई परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। बीजेपी ने जहां पीएम मोदी के दौरे को केदारनाथ धाम का गौरव बहाल करने वाला बताया है, विपक्ष ने उनके इस दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। आखिर क्‍या है सवाल पब्लिक का?

PM मोदी को महज हिंदू धर्म से जोड़ना कितना सही? सोमनाथ टू केदारनाथ...मोदी सरकार के कार्यकाल में क्‍या कुछ बदला, देखिये Sawal Public Ka
PM मोदी को महज हिंदू धर्म से जोड़ना कितना सही? सोमनाथ टू केदारनाथ...मोदी सरकार के कार्यकाल में क्‍या कुछ बदला, देखिये Sawal Public Ka 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज सुबह-सुबह केदारनाथ पहुंचे। यहां वो करीब साढ़े तीन घंटे रुके। इस दौरान उन्होंने आदिशंकराचार्य की प्रतिमा, जो उनके समाधि स्थल पर बनाई गई है, उसका आनावरण किया। वैदिक तरीके से पूजा-अर्चना की। केदार आरती की। केदार घाटी में कई  परियोजना का शिलान्यास किया। अपनी स्पीच में उन्होंने केदारनाथ से मथुरा, काशी, अयोध्या सबका जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने केदरानाथ से धार्मिक पर्यटन को लेकर कई बातें की। उन्होंने कहा कि चाहे वो चारधाम हो या हेमकुंड  साहिब, पिछले कुछ सालों में यहां जबरदस्‍त काम हुआ। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में इसका बहुत बड़ा असर होगा।

तो 2013 से पहले, 2013 के हादसे के बाद और आज की तारीख में केदारघाटी कैसी है? यह कितनी बदली है? बात सिर्फ केदारघाटी की ही नहीं, आप पश्चिम में सोमनाथ देखिए। पहले का सोमनाथ कैसा था? अब कैसा है? आप काशी विश्वनाथ देखिए! पहले का काशी विश्वनाथ कैसा होता था? अब कॉरिडोर बनने के बाद क्या हो गया है? आप अयोध्या देखिए। पहले की अयोध्या कैसी दिखती थी? अब अयोध्या का मास्टर प्लान कैसा है? काम कितनी तेजी से हो रहा है? मतलब एक जगह की बात नहीं। पीएम मोदी ने भी आज इन बातों की चर्चा केदार घाटी से की। 

प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ गए और वो बार-बार जाते रहते हैं। वहां चलने वाली विकास योजनाओं को पर्सनली मॉनिटर भी करते हैं। लेकिन कुछ नेताओं को हर बात में धर्म का एंगल निकाल लेना होता है। NCP नेता माजिद मेनन को प्रधानमंत्री की केदारनाथ यात्रा शायद चुभ गई। उन्होंने ऐसा ही ट्वीट किया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे धर्म के लिए भी उतना ही सम्मान दिखाया है।

अभी 20 अक्टूबर को ही प्रधानमंत्री मोदी कुशीनगर गए थे, जहां एक हवाईअड्डे का उद्घाटन किया और बुद्ध के चरणों में कई मिनट तक खड़े होकर अपनी तरफ से पूरा सम्‍मान दिया। बौद्धिज्म से हमको-आपको क्या सीखना चाहिए, ये भी बताया। वहीं, 2015 में प्रधानमंत्री रहते हुए पीएम मोदी UAE की यात्रा के दौरान ऐतिहासिक शेख ज़ायद मस्जिद पहुंचे थे। यहां से ली गई उनकी सेल्फी भी बहुत वायरल हुई।

पीएम मोदी ने हाल ही में वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस से मुलाकात हुई। 30 अक्टूबर, 2021 को ली गई ये तस्वीर पूरी दुनिया में वायरल हुई। इसके अतिरिक्‍त जैनियों के बीच कर्नाटक का श्रवणबेलगोला हो या पारसियों के धर्मगुरु हों, पीएम मोदी अलग-अलग मौकों पर दिखते हैं और दिखे हैं। अब सवाल पब्लिक का है : 

प्रधानमंत्री मोदी को सिर्फ हिंदू धर्म से जोड़ना कितना सही?
केदारनाथ या दूसरे हिंदू मंदिरों में मोदी के बार-बार जाने से दिक्कत क्यों है?
क्या ये सच नहीं कि चारधाम से लेकर दूसरे तीर्थस्थलों के विकास पर पहले की सरकारों ने ध्यान नहीं दिया?
मोदी मंदि‍र जाएं, तो विपक्ष को दिक्कत क्यों?
मोदी को सिर्फ हिंदू धर्म से जोड़ना कितना सही?
देश से पहले धर्म क्यों देखता है विपक्ष?
 

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