Opinion India ka: 20 साल में बेहतर होते चले गए भारत-अमेरिका के संबंध, दोनों क्यों हैं एक-दूसरे के लिए अहम

Opinion India ka: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर हैं। ऐसे में मौका है ये समझने का कि भारत-अमेरिका के संबंध कैसे हैं? दोनों के बीच व्यापारिक संबंध कैसे हैं?

Opinion India Ka
ओपिनियन इंडिया का 

'ओपिनियन इंडिया का' में बात हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की। सभी की नजरें मोदी और बाइडेन की मुलाकात पर है। इस मीटिंग से दोनों देशों के रिश्ते कितनी मजबूत होंगे, ये आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन आज वो मौका है, जब ये जाना जाए कि पिछले सात सालों में यानि मोदी राज में अमेरिका से भारत के रिश्ते कितने प्रगाढ़ हुए। बराक ओबामा जब राष्ट्रपति थे, तब पीएम मोदी उनसे चार बार मिले थे। ट्रंप से करीब 8 मौकों पर मुलाकात और बात हुई। मोदी बाइडेन से पहली बार मिलने वाले हैं। इस मीटिंग से अमेरिका और भारत के रिश्तों को नया आयाम देने की कोशिश है।

एक दौर था जब भारत और अमेरिका के बीच दूरी थी। भारत भले ही गुटनिरपेक्ष राष्ट्र था, लेकिन झुकाव रूस की तरफ था। ना हमें अमेरिका पर विश्वास था, ना अमेरिका को हम पर। लेकिन अब दोनों देशों के बीच दूरी खत्म हो चुकी है। अविश्वास की खाई पट चुकी है। अमेरिका और भारत अब बेहद करीब आ चुके हैं। अमेरिका से भारत के रिश्ते पिछले 20 सालों से लगातार बेहतर हो रहे हैं। दो दशकों में दोनों देशों के संबंधों ने एक रणनीतिक गहराई हासिल कर ली है।

साल 2000 में उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत की ऐतिहासिक यात्रा की। वो 6 दिनों तक भारत में रहे। किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की ये भारत की सबसे लंबी यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने भारत को अमेरिका की ओर लुभाने की भरपूर कोशिश की। इसे भारत-अमेरिका रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा गया। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की भारत यात्रा के दौरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर ने रिश्ते में रणनीतिक गहराई जोड़ दी। वो रिपब्लिकन पार्टी से चुने गए राष्ट्रपति थे। इसी तरह से डेमोक्रैटिक पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ती निकटता को दर्शाते हुए भारत की दो यात्राए कीं।

मौजूदा दौर में भारत और अमेरिका के बीच संबंध और भरोसा इतना मजबूत हो चुका है कि 20 बीस सालों में दोनों देशों में व्यापार करीब 6 गुना बढ़ गया है। साल 2000 में भारत अमेरिका के बीच जो व्यापार 20 बिलियन डॉलर का था वो 2020 में बढ़कर 121 बिलियन डॉलर का हो गया। अमेरिका इस वक्त दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जो भारत में सबसे ज्यादा निवेश कर रहा है। 2020-21 के दौरान अमेरिका ने भारत में 81.72 बिलियन डालर का निवेश किया। दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले वक्त में द्विपक्षीय रक्षा व्यापार 25 बिलियन डॉलर को पार करने वाला है।

सिर्फ व्यापार ही नहीं भारतीयों के लिए UAE के बाद अमेरिका दूसरा सबसे पसंदीदा देश है। अमेरिका में करीब 40 लाख भारतीय रहते हैं। करीब 2 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं। भारतीय छात्रों ने 2019-2020 में अमेरिका अर्थव्यवस्था में 7.6 बिलियन का योगदान दिया।2017 में भारतीय IT कंपनियों ने अमेरिका की जीडीपी में 57.2 बिलियन डॉलर का योगदान दिया। इसी तरह अमेरिका में सरकार किसी की भी हो, उसमें भारतीय मूल के लोगों का बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। बाइडेन प्रशासन में भारतीय मूल के 55 लोग बड़े पदों पर हैं। खुद उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भारतीय मूल की हैं।

इससे बड़ी बात ये है कि भारत और अमेरिका दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। अमेरिका की नजर भारत के बड़े बाजार पर है। मौजूदा दौर में अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता चीन है। उसकी प्राथमिकता चीन के बढ़ते वैश्विक असर को कम करना है। अगर चीन को एशिया में रोकना है, तो ये काम भारत ही कर सकता है। इसीलिए अमेरिका को भारत की जरूरत है। यही वजह है कि वो चीन और पाकिस्तान को लेकर ज्यादातर मौकों पर भारत के साथ खड़ा दिखाई देता है। 

ओबामा हों या डोनाल्ड ट्रंप। पीएम मोदी के रिश्ते दोनों से प्रगाढ़ रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के रिश्ते भी मजबूत हुए हैं। बाइडेन राज में ये रिश्ता और भी मजबूत होगा। इसमें शक की गुंजाइश नहीं। क्योंकि वर्तमान में अमेरिका के लिए भारत को अनदेखा करना संभव नहीं।
 

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