Opinion India ka: नारायण राणे की गिरफ्तारी कितनी सही? क्या हुई बदले की कार्रवाई?

Opinion India ka: 'ओपिनियन इंडिया का' में बात हुई केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी पर। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जो बयान दिया, उस पर खूब विवाद हुआ। शिवसैनिक सड़कों पर आ गए।

Narayan Rane
ओपिनियन इंडिया का 

'ओपिनियन इंडिया का' में बात हुई केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को महाराष्ट्र में गिरफ्तार कर लिया गया। राणे 20 साल में पहले मंत्री हैं जिन्‍हें गिरफ्तार किया गया है। दरअसल राणे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने पर गिरफ्तार किया गया है। नारायण राणे ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कही थी। इसके बाद बवाल भड़क गया शिवसैनिक सड़क पर उतर गए। अलग-अलग जिलों में बीजेपी दफ्तर तक पर शिवसैनिकों ने हमला किया निशाना बनाया। बीजेपी के कार्यकर्ताओं से सीधी भिड़ंत हुई। महाराष्ट्र के एक दर्जन जिलों में सड़क पर मानो जंग ही छिड़ गई हो।

बचपन में मुर्गी चुराने वाले नारायण राणे को शिवसेना छोड़ने के बाद बाला साहेब ने एक बार मुर्गी चोर क्या कहा उन्हें विरोधी इस नाम से भी चिढ़ाने लगे। मंगलवार को भी यही नजारा दिखा।  नासिक-मुंबई-अमरावती और रत्नागिरी समेत कई शहरों में शिवसैनिकों ने नारायण राणे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

राणे पर धारा 500, 505-2  और 153-B लगाया गया है। धारा 500 यानि मानहानि करना...आरोप साबित होने पर इसमें 2 साल जेल..जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। धारा 505-2 यानि समुदायों के बीच घृणा पैदा करना। आरोप साबित हुआ तो 3 साल तक जेल/जुर्माना/दोनों। धारा 153-B यानि  समुदाय के विरुद्ध बोलना...आरोप साबित हुआ तो  5 साल तक की सजा 
का प्रावधान है।

2005 में छोड़ी शिवसेना

किसी जमाने में नारायण राणे मातोश्री के बेहद करीब हुआ करते थे। राणे पर बाल ठाकरे का आशीर्वाद था। लेकिन साल 2005 में शिवसेना से उनकी विदाई हो गई। हालांकि उनकी राजनीति की स्टाइल अभी भी शिवसेना वाली ही है। वो अपने तल्ख बयान के लिए जाने जाते हैं। ऐसे बयान जो राजनीतिक मर्यादा की दहलीज को पार कर जाती है। लेकिन सवाल उठता है कि ऐसे बयान देने वाले राणे इकलौते नेता है- क्योंकि ज्यादा दिन नहीं बीते जब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी अपने ऐसे ही बयान से सुर्खियों में आ गए थे।

सवाल है गलत और सही का

बीजेपी नेता नारायण राणे की जुबां से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए अपशब्द निकले तो उनकी गिरफ्तारी हो गई, लेकिन अपनी ही सरकार में गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख कानून का मजाक उड़ाते हुए छुट्टे घूम रहे हैं, पर उद्धव की जुबां से एक शब्द नहीं फूटा। सवाल नारायण राणे या अनिल देशमुख का नहीं है। सवाल है गलत और सही का। क्योंकि नारायण राणे अगर मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने के आरोप में तीन-तीन एफआईआर झेलते हुए गिरफ्तार होते हैं तो खुद उद्धव को क्यों नहीं सलाखों के पीछे होना चाहिए था, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चप्पल से मारने की बात कह दी थी।  

योगी पर क्या बोल गए थे उद्धव ठाकरे

26 मई 2018 को ठाकरे ने कहा था- कल परसों वो आए थे आदित्यनाथ, कैसा योगी ये तो भोगी है। अगर योगी है तो कैसे मुख्यमंत्री हो सकता है...योगी है तो सब त्याग करके बैठे। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का नाता ये क्या बताएगा। शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक करने के लिए वहां से गागाभट्ट आए थे, उनका कितना सम्मान है। ये योगी तो गैस के गुब्बारे की तरह है सिर्फ हवा में उड़ता रहता है। आया तो सीधे चप्पल पहनकर महाराज के पास गया। ऐसा लग रहा था उसी चप्पल से उसे मारूं। फिर, नारायण राणे तो खुद मिजाज से शिवसैनिक ही हैं। 15 साल की उम्र में उन्होंने शिवसेना ज्वॉइन की थी, और लड़ाई-झगड़े और बद्जुबानी की सारी ट्रेनिंग उनकी शिवसेना में रहते हुए ही हुई। 

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