Nirbhaya Case: दोषी अक्षय की SC में दलील- प्रदूषण से लोग दिल्ली में ऐसे ही मर रहे हैं, तो फांसी की क्या जरूरत

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Updated Dec 10, 2019 | 19:37 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Nirbhaya Case : दोषी पवन ने अपनी दलील में कहा है कि दिल्ली में हवा और पानी खराब होने के चलते लोग ऐसे ही मर रहे हैं तो ऐसे में किसी को फांसी पर चढ़ाने की क्या जरूरत है।

Nirbhaya Case convict Akshay's plea in SC air of Delhi is full of poison no need to hang, दोषी अक्षय की SC में दलील- प्रदूषण से लोग दिल्ली में ऐसे ही मर रहे हैं, तो फांसी की क्या जरूरत
Nirbhaya Case : 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के मुनरिका में हुई जघन्य वारदात।  |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली : निर्भया गैंगरेप के दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह ने अपनी फांसी के बचाव में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अजीबो-गरीब दलील दी। अक्षय ने अपनी अर्जी में कहा है कि दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो गई है और यहां प्रदूषण से लोग ऐसे ही मर रहे हैं तो किसी को फांसी पर चढ़ाने की क्या जरूरत है। अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी फांसी की सजा में राहत देने की मांग की है। बता दें कि इस केस के अन्य दोषियों में से एक विनय शर्मा की दया याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो निर्भया के दोषियों विनय शर्मा, अक्षय, पवन और मुकेश को फांसी पर चढ़ाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन तैयारी कर रहा है। 

अक्षय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया है, 'दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है और दिल्ली एक गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है। इस बात की पुष्टि भारत सरकार ने अपनी रिपोर्ट में की है। दिल्ली में लोगों का जीवन दिनोंदिन कम होता जा रहा है। राजधानी का हवा और पानी खराब होने के चलते लोग ऐसे ही मर रहे हैं तो ऐसे में किसी को फांसी पर चढ़ाने की क्या जरूरत है।'

बता दें कि 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली के मुनरिका में 23 साल की मेडिकल स्टूडेंट के साथ हुई गैंगरेप की इस भयावह घटना ने देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया। इस केस की सुनवाई के दौरान एक आरोपी राम सिंह की मौत हो गई। इस जघन्य केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को फांसी की सजा सुनाई है। इस घटना के बाद देश भर के लोगों में आक्रोश देखा गया। दिल्ली में इंडिया गेट पर प्रदर्शन हुए। लोगों के गुस्से और दोषियों को जल्द सजा देने के लिए सरकार ने इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने का फैसला किया।

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