News Ki Pathshala: लखीमपुर जाने वाले नेता क्या पंजाब, छत्तीसगढ़ और बंगाल भी जाएंगे? जानिए और क्या है खास

News Ki Pathshala में आज आपको किसान आंदोलन पर चल रही राजनीति के अलावा तालिबान सरकार के आंतकी मंत्री के ट्वीट और अन्य विषय़ों पर विस्तार से जानकारी देंगे।

News Ki Pathshala Politicians who are going to Lakhimpur, will go to Punjab, Chhattisgarh and Bengal too?
News Ki Pathshala: लखीमपुर जाने वाले नेता क्या पंजाब, छत्तीसगढ़ और बंगाल भी जाएंगे? Sushant Sinha 

मुख्य बातें

  • राहुल गांधी और मुख्यमंत्रियों भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी पहुंचे यूपी
  • तालिबान सरकार के मंत्री हक्कानी ने सोमनाथ मंदिर को लेकर किया ऐसा ट्वीट
  • नितिन गडकरी को यहां दिये गए टोल टैक्स आंकड़ों पर जरूर डालनी चाहिए एक नजर

नई दिल्ली: पाठशाला में आज है- लखीमपुर जाने की होड़ में नेता क्या भूल गए हैं? न्याय की लड़ाई में Conditions Apply वाला चैप्टर। लुटेरे गजनवी की कब्र दिखाने वालों की क्लास लगेगी। नेता फोकट में चलें, टोल टैक्स सिर्फ पब्लिक क्यों भरे? ये भी देखना चाहिए कि किसानों से हमदर्दी दिखाने वाले खुद क्या कर रहे हैं? दो दिन पहले राजस्थान में किसानों को पीटा गया था। राजस्थान में कांग्रेस की ही सरकार है। वहां के हनुमानगढ़ जिले में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। क्योंकि धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई थी जबकि पंजाब-हरियाणा में धान की खरीद शुरू हो गई थी। किसान धान से भरी ट्रालियां लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए और धान की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग करने लगे लेकिन किसानों को पुलिस ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा था। इस पिटाई में कम से कम 8 किसानों को गंभीर चोटें आईं थीं।इनमें से कई घायल किसान अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
 

ऐसा है छत्तीसगढ़ का हाल

अब छत्तीसगढ़ की बात करते हैं, यहां भी कांग्रेस की सरकार है। लेकिन छत्तीसगढ़ के सीएम को लखीमपुर की ज़्यादा चिंता है। राहुल गांधी के साथ सीएम भूपेश बघेल भी लखीमपुर गए। भूपेश बघेल दो दिन पहले ही रायपुर से लखनऊ पहुंच गए थे। उन्हें एयरपोर्ट से निकलने नहीं दिया गया, तो वहीं धरने पर बैठ गए। लेकिन उनके अपने राज्य में क्या हो रहा है, क्या उन्हें फिक्र है? भूपेश बघेल लखीमपुर हिंसा की पॉलिटिक्स में बिज़ी हैं। उधर उनके राज्य के एक जिले में सांप्रदायिक दंगा हो गया। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में दंगे के बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा। जिले की सीमाएं सील करनी पड़ी, इंटरनेट बंद करना पड़ा। ये मामला बिजली के खंबे पर एक झंडा लगाने और उतारने से शुरू हुआ। उसे लेकर दो गुट भिड़ गए, मारपीट-पथराव-तोड़फोड़-आगजनी हुई।

अपने राज्य में एक भी किसान को मुआवजा नहीं

अगर एक राज्य के किसानों को दूसरा राज्य मुआवजा दे सकता है तो उस राज्य को अपने यहां के किसानों को मुआवजा भी देना चाहिए। इसी साल फरवरी में छत्तीसगढ़ सरकार ने वहां की विधानसभा में बताया था कि 1 अप्रैल 2020 से 1 फरवरी 2021 के बीच 10 महीने में छत्तीसगढ़ के 141 किसानों ने आत्महत्या की छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा गया था कि  इन किसानों की आत्महत्या पर क्या किसी को मुआवजा दिया गया या नहीं इस पर सरकार ने जवाब दिया कि पहले के 15 साल में भी किसान आत्महत्या हुई थीं, तब तो किसी ने मुआवजा देने के बारे में नहीं सोचा।

बंगाल नहीं गया एक भी राजनेता

जैसी मारामारी लखीमपुर जाने की है वैसी मारामारी कहीं और जाने की नहीं दिखी। बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा सबने देखी। लेकिन पीड़ित किसी और पार्टी के थे। पीड़ित किसी विपक्ष शासित राज्य में थे इसलिए वहां के पीड़ितों की अनदेखी कर दी।  बंगाल जाना तो दूर की बात थी किसी ने सख्त लहजे में ममता बनर्जी पर सवाल नहीं उठाए। निष्पक्ष जांच का दवाब तक नहीं बनाया। हालत ये हो गई कि कोलकाता हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा। कोर्ट की निगरानी में CBI, SIT की जांच का आदेश देना पड़ा। यहां तक कह दिया गया कि रूल ऑफ लॉ नहीं बल्कि लॉ ऑफ रुलर है पर फिर भी कोई हंगामा नहीं हुआ।

पाठशाला में अब इकॉनमिक्स की क्लास

आप और हम हर टोल पर टैक्स भरते हैं लेकिन नेताओं और बाबुओं के लिए फ्री राइड है। सरकार चाहती है कि आप टोल टैक्स भरते रहें लेकिन 
-नेताओं और बाबुओं की जेब से कुछ ना जाएं। हम ये बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल में जब परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से किसी पत्रकार से पूछा
-कि टोल प्लाज़ा के लिए पत्रकारों को मुफ्त पास क्यों नहीं दिए जाते। तो इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि वो फोकट क्लास के सपोर्टर नहीं, यानी किसी को भी मुफ्त में सेवाएं लेने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। लेकिन ये बात सिर्फ पब्लिक पर क्यों लागू होती है, आज हमारा सवाल यही है। नितिन गडकरी की ये बात तो सही है कि अच्छी सड़कें चाहिए तो पैसे देने होंगे। लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि टोल टैक्स तो सिर्फ पब्लिक ही दे रही है
-नेताओं और अफसरों को तो टोल ना चुकाने की छूट मिली है और टोल टैक्स से छूट की लिस्ट लंबी होती जा रही है।
टोल टैक्स में छूट पाने वाली कैटेगरी

  1. 2010 में - 9 
  2. 2021 में- 25 

छूट पाने वाली कैटेगरी में कौन कौन आते हैं। ये भी जानना ज़रूरी है
- राष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- उपराष्ट्रपति
- राज्यपाल 
- चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया
- लोकसभा स्पीकर
- केंद्रीय मंत्री 
- मुख्यमंत्री 
- आर्मी चीफ
- विधानसभा स्पीकर
- चीफ जस्टिस, हाईकोर्ट 
- सांसद 
- आर्मी कमांडर 
- राज्यों के प्रमुख सचिव 
- केंद्र सरकार के सचिव 
- राज्यों के कैबिनेट सचिव
- लोकसभा सचिव 
- विदेशी मेहमान 
- विधायक
- अवॉर्ड विजेता
- राज्य सरकारों की अपनी लिस्ट

सरकार ने उठाया था ये कदम

टोल प्लाजा पर मिलने वाली छूट का दुरुपयोग रोकने के लिए 2017 में मोदी सरकार ने कदम उठाया। जिन्हें छूट मिलनी हैं उन्हें  Nation Highway Authority of India Zero Transaction Tags जारी करती है। इन टैग की एक सीमित वैलेडिटी होती है और इनके लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता। छूट लेने के लिए NHAI में एप्लीकेशन देनी पड़ती है। प्रधानमंत्री और उनकी सुरक्षा से जुड़े वाहनों के लिए 354 टैग जारी होते हैं। हर सांसद को दो Fastags जारी होते हैं। एक दिल्ली के लिए और एक उनके क्षेत्र के लिए विधायकों को एक Free Fastag जारी होता है। ऐसा नहीं कि सांसदों को सिर्फ टोल टैक्स चुकाने से ही छूट मिलती है। सैलरी और पेंशन के अलावा सांसदों को कई तरह की छूट मिलती है।
- हर साल 34 हवाई यात्रा मुफ्त
- हर साल 8 रेलवे यात्रा मुफ्त
- सांसद को अपनी पत्नी या पति के साथ भारत में कभी भी ट्रेन से जाने की मुफ्त सुविधा
- दिल्ली के आवास पर हर साल 50000 यूनिट तक बिजली फ्री
- हर साल 50000 लोकल कॉल फ्री
- हर महीने अपने दफ्तर के लिए 20000 रुपये भत्ता

अब बात हक्कानी के बयान

तालिबान सरकार के मंत्री महमूद गजनवी की कब्र पर जाने के बाद अनस हक्कानी ने ट्वीट करते हुए कहा, ''10 वीं शताब्दी के प्रसिद्ध मुस्लिम योद्धा और मुजाहिद सुल्तान महमूद गजनवी की दरगाह का दौरा किया। गजनवी ने गजनी के पूरे इलाके में एक मजबूत मुस्लिम राज स्थापित किया और सोमनाथ की मूर्तियों को तोड़ा था '

कौन था महमूद गजनवी 

महमूद गजनवी साल 998 में गजनी की गद्दी पर बैठा और गजनवी ने बगदाद के खलीफा के कहने पर भारत पर हमला किया। गजनवी ने भारत पर हमला साल 1001 में किया था। कुल मिलाकर उसने 17 बार भारत पर हमले किये थे। 1026 में उसने 16वां हमला सोमनाथ मंदिर पर किया। गजनवी ने सोमनाथ मंदिर की अकूत संपदा लूटी थी। सोमनाथ मंदिर में मूर्तियों को तोड़ दिया था। 50 हजार लोगों के कत्ल का भी करवाया था और गजनवी ने कई मंदिरो की मूर्तियों को तोड़ा था। जिसके बाद गजनवी ने 'Idol Breaker' की उपाधि धारण की थी। इतिहासकार रिचर्ड डेविस अपनी किताब 'Lives of Indian Images' में लिखते हैं कि मूर्तियों को तोड़ना मुस्लिम होने के नाते गजनवी अपना फर्ज समझता था। इतिहासकारों के मुताबिक सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी लगभग 20 लाख दीनार के मूल्य की संपदा लूट कर गया था।

शानदार है सोमनाथ मंदिर

अगर अनस हक्कानी को इस बात का फख्र है कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा, मूर्तियों को तोड़ा। तो हर हिंदुस्तानी को इस पर गर्व है कि बार बार तोड़े जाने के बाद भी सोमनाथ मंदिर और भव्य रूप में सामने आया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर परिसर के पुनर्निमाण का उद्घाटन किया था। अब सोमनाथ मंदिर और भव्य और हाईटेक सुविधाओं से लैस हो गया है। भक्तों की सुविधा के लिए छतरियों (Canopies) वाला व्यू कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा। मंदिर तक जाने के लिए मुख्य मार्ग को और चौड़ा और आकर्षक बनाया जाएगा क्रूज, फेरी सर्विस और बोट राइड की सुविधा भी शुरू होने वाली है 
 

सोमनाथ मंदिर भारत के सबसे समृद्ध और प्रभावशाली मंदिरों में से एक है। सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है। सोमनाथ मंदिर में इसी साल 6 अगस्त से 9 सितंबर तक 8.5 लाख भक्त आए। प्रतिदिन औसतन 13 हजार श्रद्धालु आते हैं। कोविड के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई 
सालाना 50 से 60 लाख श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की सालाना आय लगभग 140 करोड़ रुपये है। 2020-2021 में 21 करोड़ का दान/चढ़ावा मिला। 2019-2020 में 44 करोड़ का चढ़ावा/दान मिला था।

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