News ki pathshala: तालिबान को हैंडल करने का इंडियन फॉर्मूला क्या है?

News ki pathshala: अफगानिस्तान में पाकिस्तान की मुराद पूरी हो गई है क्योंकि तालिबान को पाकिस्तान ने पाला-पोसा है। तालिबान के जरिए पाकिस्तान राज करेगा।

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न्यूज की पाठशाला 

'न्यूज की पाठशाला' में बात हुई कि आखिर तालिबान को हैंडल करने का इंडियन फॉर्मूला क्या है? साथ ही पाकिस्तान के आतंकी वायरस का 'हक्कानी वेरिएंट', इस पर भी क्लास लगी। अफगानों की चीख में पॉजिटिविटी ढूंढने वालों की क्लास लगी। अफगानिस्तान के इंडिया चैप्टर में बताया गया कि भारत की तालिबान से पहली आधिकारिक बातचीत हुई है। कतर के दोहा में भारतीय दूतावास के अंदर मीटिंग हुई। मीटिंग की रिक्वेस्ट तालिबान की तरफ से आई थी। कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल और तालिबान के दोहा ऑफिस के हेड शेर मोहम्मद अब्बास स्टैनकजई के बीच बातचीत हुई।

तालिबान से जुड़ी हर बात कतर में होती है। दुनिया में दूसरे भी मुस्लिम देश हैं, सऊदी अरब है, यूएई है, और दूसरे देश हैं, लेकिन पूरी दुनिया कतर में जाकर तालिबान से बात करती है। कतर का रोल इतना अहम क्यों है?

तालिबान का पॉलिटिकल ऑफिस कतर में है
इस ऑफिस को तालिबान ने 2013 में खोला था
तालिबान की बड़ी लीडरशिप दोहा में रहती है
तालिबान के सभी आकाओं के परिवार वहां पर हैं

लेकिन बातचीत के लिए कतर को ही जगह क्यों चुना?

पहली बात- कतर के ज्यादातर देशों से अच्छे संबंध हैं
दूसरी बात- बातचीत की सबसे अच्छी न्यूट्रल जगह है
तीसरी बात- किसी पक्ष को कतर से कोई दिक्कत नहीं थी
चौथी बात- कतर को खुद भी बातचीत में दिक्कत नहीं थी
पांचवीं बात- कई मामलों में कतर पहले भी मध्यस्थ रह चुका है
छठी बात- कतर भी चाहता है कि सबसे उसके अच्छे रिश्ते बने रहे
सातवीं बात- खासतौर पर अमेरिका से अच्छे रिश्ते रहे, क्योंकि सऊदी अरब, यूएई...कतर के विरोधी हैं, और अमेरिका के करीब वो दिखना चाहता है
 

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