महंत नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट आया सामने, हुए हैरान करने वाले खुलासे, यहां पढ़ें पूरा लेटर

Narendra Giri suicide note: महंत नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट सामने आ गया है। इससे कई हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। इसमें उन्होंने साफ-साफ अपने शिष्य आनंद गिरी का नाम लिया है।

Narendra Giri suicide note
महंत नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट सामने आ गया है। टाइम्स नाउ नवभारत पर नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट है। सुसाइड नोट में साफ-साफ आनंद गिरि का नाम है। उन्होंने लिखा है कि आनंद गिरी मेरी छवि खराब करना चाहता था। सुसाइड नोट में आनंद गिरी को मौत का जिम्मेदार बताया गया है। वो कहते हैं कि आनंद गिरि मेरी छवि खराब करना चाहता था। मेरी फोटो एडिट करके महिला के साथ दिखाई गई। दुखी होकर आत्महत्या का फैसला किया।

2 लिफाफे मिले, जिसमें 3-3 कागज थे यानि कुल 12 पेज का सुसाइड नोट है। अध्यक्ष श्री मठ बाघम्बरी के लैटर पैड पर लिखा गया है। वो कहते हैं कि मैं बेहद दुखी होकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मैं बहुत दुखी हूं, मेरी मौत की जिम्मेदारी आनंद गिरी, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी की है। प्रयागराज के पुलिस से अनुरोध है कि इन तीनों के खिलाफ कानूनी कार्यवाई करें, ताकि मेरी आत्मा को शांति मिले। महंत नरेंद्र गिरी ने लिखा कि वो 13 सितंबर को ही आत्महत्या करना चाह रहे थे, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाए। महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि हरिद्वार में सूचना मिली कि आनंद गिरी कंप्यूटर के माध्यम से मोबाइल से किसी गलत काम करते हुए मेरी फोटो लगाकर फोटो वायरल कर दी। मैंने सोचा सफाई किस किस को दूंगा, बदनामी होगी। इसलिए मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरी मौत के जिम्मेदार आनंद गिरी, आद्या तिवारी, संदीप तिवारी होंगे। महंत नरेंद्र गिरी ने लिखा कि आनंद गिरी ने असत्य, मिथ्या, मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। तब से मैं मानसिक दबाव में जी रहा हूं। 

महंत ने लिखा कि जब भी मैं एकांत में रहता हूं, मेरी मर जाने की इच्छा होती है, इन तीनों ने मेरे साथ विश्वासघात किया, सब कुछ मैं अपने होश में लिख रहा हूं, मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। इन तीनों ने मुझे जान से मारने की कोशिश की। सोशल मीडिया फेसबुक, समाचार पत्र में मेरे चरित्र के ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगाया। मैं मरने जा रहा हूं। मैं सत्य बोलूंगा, मेरा घर से कोई संबंध नहीं है। मैंने एक भी पैसा घर पर नहीं दिया। मैंने एक एक पैसा मंदिर और मठ में लगाया। 2004 में मैं महंत बना, 2004 से पहले अभी जो मठ और मंदिर का विकास किया, सभी भक्त जानते हैं। आनंद गिरी द्वारा जो भी आरोप लगाया गया उससे मेरी और मठ मंदिर की बदनामी हुई। मैं बहुत आहत हूं, मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरे मरने की संपूर्ण जिम्मेदारी आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी जो मंदिर के पुजारी हैं, आद्या प्रसाद का बेटा संदीप तिवारी की होगी। मैं समाज में हमेशा शान से जिया, लेकिन आनंद गिरी ने मुझे गलत तरीके से बदनाम किया। मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरी समाधि स्थल गद्दी पर गुरू जी के बगल नींबू के पेड़ के पास लगाई जाए। प्रिय बलवीर, ओम नमो नारायण। प्रयास करना कि मठ-मंदिर की व्यवस्था जैसे मैंने किया उसी तरह चलती रहे। परम पूज्य महंत हरि गोविंद पुरी जी से निवेदन है कि महंत बलवीर गिरी को उत्तराधिकारी बनाना। आशुतोष और नीतेश सभी महात्मा बलवीर का सहयोग करें। महंत रविंद्र आपने हमेशा मेरा साथ दिया, मेरे मरने के बाद बलवीर का साथ देना। मेरी अंतिम इच्छा है कि धनंजय मेरे कमरे की चाभी बलवीर गिरी जी को सौंप दें। आदित्य मिश्र और शैलेंद्र सिंह रियल एस्टेट से 25-25 लाख रुपए मांगना है। 

सुसाइड नोट पर महंत नरेंद्र गिरी नाम से हस्ताक्षर भी है। बलवीर जी, मेरे शिष्यों का ध्यान रखना। मनीष शुक्ला, अभिषेक मिश्र और शिवांक मिश्र मेरे अति प्रिय हैं। कोरोना काल में सुमित तिवारी ने मेरी मदद की। मंदिर में माला फूल की दुकान सुमित तिवारी को दिया। मनीष शुक्ला को लड्डू की दुकान दी है। 

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