India China News: क्‍या चीन ने बसा लिया अरुणाचल में गांव? अमेरिकी रिपोर्ट के दावों में कितना दम?

पेंटागन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के भीतर गांव बसा लिया है, जिसमें 100 घर नजर आ रहे हैं। इसे लेकर विपक्ष सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। आखिर क्‍या है अरुणाचल सीमा का सच? 

क्‍या चीन ने बसा लिया अरुणाचल में गांव? अमेरिकी रिपोर्ट के दावों में कितना दम?
क्‍या चीन ने बसा लिया अरुणाचल में गांव? अमेरिकी रिपोर्ट के दावों में कितना दम? 

अमेरिकी रक्षा विभाग ने चीन से जुड़े सैन्य और सुरक्षा विकास की सालाना रिपोर्ट में चीन को लेकर बड़ा दावा किया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने  भारत के अरुणाचल प्रदेश के बीच विवादित क्षेत्र में 100 घरों का गांव बसा दिया है। दावा किया गया है कि चीन ने सीमा के करीब साढ़े चार किलोमीटर अंदर ये गांव बसाया है। इस रिपोर्ट की सच्चाई क्या है और वास्तविक हालात क्या है ये जानना जरूरी है। क्या ये भारत के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा है या फिर विरोधियों का एजेंडा है। लेकिन मोदी सरकार को बात-बात पर घेरने वाली कांग्रेस को सरकार को घेरने का एक और मौका जरूर मिल गया है। इस रिपोर्ट के बहाने कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला कर रही है। पीएम मोदी से जवाब मांग रही है और कह रही है कि 17 महीने पहले पीएम ने चीन को जो क्लीनचिट दी थी उसे वापस लें और देश से माफी मांगें।

पेंटागन की रिपोर्ट में क्‍या है दावा?

चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा में घुसपैठ की है 
करीब 4.5 किमी अंदर घुसकर एक गांव बसाया 
इस गांव में करीब 100 घर नजर आ रहे हैं 
सुबनसिरी जिले के त्सारी चू गांव में है इलाका 

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लिया है। रिजिजू ने कांग्रेस सरकार में रक्षामंत्री रहे एके एंटनी का 6 सितंबर, 2013 में लोकसभा में दिए भाषण का वीडियो फिर से ट्वीट करके कांग्रेस पर सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के जिस बयान का हवाला रिरिजू ने दिया है, उसके मुताबिक, कई सालों तक आजाद भारत की नीति रही है कि सीमाओं को विकसित नहीं करना ही सर्वश्रेष्ठ बचाव है। यानी विकसित सीमाओं के मुकाबले अविकसित सीमाएं ज्यादा सुरक्षित होती हैं...इसलिए, कई वर्षों तक, सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और हवाई क्षेत्रों का निर्माण नहीं हुआ था, उस समय तक, चीन ने सीमाओं पर अपने बुनियादी ढांचे को विकसित करना जारी रखा था। इसी का नतीजा है कि वे बुनियादी ढांचे और क्षमताओं में अब हमसे आगे निकल गए हैं, मैं स्वीकार करता हूं कि वो हमसे आगे हैं। ये इतिहास का एक हिस्सा है।

अरुणाचल सीमा पर चीनी घुसपैठ के दावे के बीच एडिशनल डिप्टी कमिश्नर डीजे बोरा का कहना है कि वहां लंबे वक्त से चीनी सेना का स्थायी सैन्य कैंप बना है। 2020 में सर्वेक्षण किया गया था और तब नागरिक बसाव कोसों दूर था। इस क्षेत्र में चीनी सेना (PLA) का कब्जा है। वहां बहुत से घर हैं, जो सैन्य उद्देश्यों के लिए बने हैं। चीनी सेना ने 1962 में इस इलाके में कब्जा किया था, तब यहां उनके छोटे-छोटे पोस्ट थे। जहां चीनी सेना का कब्जा वहां 1962 में भारत की आखिरी चौकी थी। उस समय पोस्ट को माजा कैंप कहा जाता था।

इन तमाम दावों, आरोप-प्रत्‍यारोपों के बीच अब सवाल है: 

क्‍या चीन ने सचमुच अरुणाचल में गांव बसा लिया? 
अमेरिकी रिपोर्ट प्रोपेगेंडा है या किसी का एजेंडा? 
मोदी चीन से लड़ रहे हैं तो विपक्ष किसके साथ है? 
अमेरिकी रिपोर्ट के दावों में कितना दम है?
अरुणाचल सीमा का सच आखिर क्‍या है?

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