झारखंड: CIMFR में करोड़ों रुपए की हेराफेरी आई सामने, RTI से हुआ खुलासा

केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CIMFR) में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। तनख्वाह ले रहे कर्मचारियों ने कंसलटेंसी फीस ली। RTI के जरिए मामले का खुलासा हुआ।

cimfr
CSIR के डीजी ने मामले का संज्ञान लिया है 

झारखंड के धनबाद में स्थित केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान यानी CIMFR में करोड़ों रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। सरकार से तनख्वाह ले रहे अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट कंसलटेंसी और टेस्टिंग के नाम पर यहां खुद ही करोड़ों रुपए का भुगतान ले लिया। मामले का संज्ञान लेते हुए CSIR के डीजी ने इस बाबत एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से पैसे लौटाने के लिए कहा गया है।

सिम्फर में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। CSIR के डीजी ने मामले का संज्ञान लिया है। ये खुलासा RTI के जरिए हुआ। सीबीआई की टीम CIMFR संस्थान पहुंची, साथ में विजिलेंस डिविजन की टीम भी पहुंची। संस्थान से जुड़ी शिकायतें मिलने पर औचक निरीक्षण किया गया कई दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। 

आरोपों के मुताबिक अकेले सिम्फर के निदेशक डॉक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने ही 17 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया है। प्रदीप कुमार सिंह ने 2016 से 2021 के बीच कुल 17 करोड़ 89 लाख रुपए खर्च किए हैं। हाल के दिनों की बात करें तो जनवरी के बाद से ही 2 करोड़ 16 करोड़ लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया है।

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