SCO meeting : एस जयशंकर की दो टूक, 'आपसी संबंधों को तीसरे देश के नजरिए से न देखे चीन'

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 17, 2021, 10:35 AM IST

S Jaishankar meets Wang Yi : विदेश मंत्री एस जयशंकर की दुशांबे में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात हुई है। जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि चीन आपसी संबंध को तीसरे देश के नजरिए से मत देखे।

नई दिल्ली : शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने ताजिकिस्तान की राजधानी पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी चीनी समकक्ष वांग यी से दो टूक शब्दों में कहा है कि शांति बहाली के लिए पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाकों से चीनी सेना की पूरी तरह से वापसी जरूरी है। दोनों नेताओं के बीच एससीओ बैठक से इतर यह मुलाकात हुई। समझा जाता है कि चीनी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में जयशंकर ने अफगानिस्तान मसले पर भी चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि भारत ने चीन से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह नई दिल्ली-बीजिंग संबंधों को किसी तीसरे देश के नजरिए से मत देखे। एससीओ की इस बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल संबोधित करने वाले हैं। अब सबकी नजर पीएम मोदी के संबोधन पर है।     

एससीओ बैठक से इतर मुलाकात हुई

यांग वी के साथ मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने अपने एक ट्वीट में कहा, ‘चीन के विदेश मंत्री से दुशांबे में एससीओ की बैठक से इतर मुलाकात हुई। अपने सीमावर्ती क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर चर्चा की और यह रेखांकित किया कि शांति बहाली के लिए यह बेहद जरूरी है और यह द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का आधार है। यह भी आवश्यक है कि भारत के साथ अपने संबंधों को चीन किसी तीसरे देश की निगाह से नहीं देखे। जहां तक एशियाई एकजुटता की बात है तो चीन और भारत को उदाहरण स्थापित करना होगा।’

अफगानिस्तान में बदले हालात को देखते हुए बैठक अहम

अफगानिस्तान में तालिबान का राज कायम हो जाने के बाद एससीओ की यह बैठक बेहम अहम मानी जा रही है। अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार पर पाकिस्तान और चीन दोनों अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं। ये दोनों देश एससीओ के सदस्य भी हैं। ऐसे में अफगानिस्तान पर भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों का रुख बहुत मायने रखता है। समझा जाता है कि पीएम मोदी अफगानिस्तान, तालिबान, पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में कोई बयान दे सकते हैं। अफगानिस्तान को लेकर भारत अभी 'देखो और प्रतीक्षा करो' की नीति पर कायम है। 

गलवान घाटी की हिंसा के बाद तनाव बढ़ गया था

पिछले साल पांच मई को पूर्वी लद्दाख के गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए थे। मौजूदा समय में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे संवेदनशील सेक्टर में दोनों तरफ 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद कुछ इलाकों से दोनों देशों ने अपने सैनिकों को पीछे बुलाया है। 
 

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