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Vande Bharat Metro Train: झारखंड, बिहार, बंगाल और ओडिशा...चार राज्यों के 19 रूटों पर दौड़ेगी Vande Bharat, रेलवे का इस बार बड़ा प्लान

Vande Bharat Metro Train: दक्षिणी पूर्व रेलवे जोन के भीड़ वाले 19 रूटों पर जल्द ही वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलती नजर आएगी। रेलवे इस जोन के झारखंड, बिहार, बंगा औ ओडिशा के स्टेशनों पर वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सर्वे भी करा लिया है। अधिकारियों का कहना है कि टाटानगर से गया, हावड़ा से धनबाद मार्ग पर वंदे भारत मेट्रो चलाने की योजना है।

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वंदे भारत

Photo : Twitter

Vande Bharat Metro Train: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर भारतीर रेलवे बड़ा प्लान तैयार कर रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो दक्षिणी पूर्व रेलवे जोन के भीड़ वाले 19 रूटों पर जल्द ही वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलती नजर आएगी। रेलवे इस जोन के झारखंड, बिहार, बंगा औ ओडिशा के स्टेशनों पर वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सर्वे भी करा लिया है। अधिकारियों का कहना है कि टाटानगर से गया, हावड़ा से धनबाद मार्ग पर वंदे भारत मेट्रो चलाने की योजना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

भारतीय रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल टाटानगर स्टेशन से होकर हावड़ा तक वंदे भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है। इसमें ज्यादातर सीट टाटानगर से ही बुक हो जाती हैं। अब नई योजना के मुताबिक, रांची, बोकारो, राउरकेला, टोरी, आसनसोल, खड़गपुर से दीघा, बालासोर व अन्य मार्गों पर वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी।

पर्यटन को भी बढ़ावा देगी वंदे भारत

अधिकारियों के अनुसार, नए मार्गों पर वंदे भारत चलाने के लिए यात्रियों की लगातार मांग आ रही है। ऐसे रूटों को चिह्नित कर लिया गया है, और वहां जल्द ही ट्रायल कराया जाएगा। रेलवे ने बताया कि वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलने से दक्षिणी पूर्व रेलवे जोन के झारखंड, बंगाल व ओडिशा के पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों में टिकट बुकिंग और यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होगा।

क्या है वंदे भारत मेट्रो

यात्रियों को आरामदायक सफर देने के लिए देश में तेजी से वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का जाल बिछाया जा रहा है। हालांकि, ये ट्रेनें लंबे रूट चल रही हैं। अब रेलवे की योजना उपनगरीय यात्रा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेन की है। ऐसे में वंदे भारत मेट्रो को लॉन्च किया गया है, जो लगभगर 100 से 250 किलोमीटर की दूरी के भीरत देश के 124 शहरों को जोड़ेगी। यानी इससे इंटरसिटी और इंट्रा-सिटी देानों तरह की सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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