Supreme Court CDSL Stay: सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले के अमल पर रोक लगा दी है, जिसमें एक स्टॉक ब्रोकर की कथित धोखाधड़ी के मामले में कंपनी को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह एक ऐसा सवाल है, जिसकी विस्तृत जांच की जानी चाहिए। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
CDSL को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत (फाइल फोटो)
मामला डिपॉजिटरीज एक्ट, 1996 की धारा 16 से जुड़ा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक स्टॉक ब्रोकर द्वारा की गई धोखाधड़ी के लिए सीडीएसएल लाभकारी स्वामी (बेनिफिशियल ओनर) को क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, सीडीएसएल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यदि हाई कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा जाता है, तो इसका असर पूरे भारतीय प्रतिभूति बाजार की संरचना और उसके कामकाज पर पड़ सकता है।
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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला केवल एक निवेशक और एक डिपॉजिटरी के बीच विवाद का नहीं है, बल्कि इससे पूरे शेयर बाजार के नियामकीय ढांचे पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अदालत से कहा कि इस मामले में डिपॉजिटरी, डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट, स्टॉक ब्रोकर और अन्य बाजार मध्यस्थों की कानूनी जिम्मेदारियों की समीक्षा जरूरी है। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इस प्रश्न की जांच किए जाने की आवश्यकता है।" इसके साथ ही अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के अमल पर रोक लगा दी।
क्या है CDSL और इसका काम क्या है?
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) भारत की दो प्रमुख डिपॉजिटरी संस्थाओं में से एक है। दूसरी संस्था नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) है। डिपॉजिटरी का काम निवेशकों के शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड यूनिट और अन्य प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक यानी डीमैट (Demat) रूप में सुरक्षित रखना होता है। यदि कोई निवेशक शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर खरीदता है, तो वे कागज के रूप में नहीं, बल्कि उसके डीमैट खाते में जमा होते हैं।
सीडीएसएल इसी पूरी व्यवस्था का संचालन करती है। सीडीएसएल का कहना है कि अगर किसी स्टॉक ब्रोकर की धोखाधड़ी के लिए डिपॉजिटरी को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो इससे प्रतिभूति बाजार में काम करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारियों का मौजूदा ढांचा बदल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि डिपॉजिटरीज एक्ट, 1996 के तहत डिपॉजिटरी की जवाबदेही की सीमा क्या है और क्या किसी ब्रोकर की धोखाधड़ी के लिए उसे क्षतिपूर्ति देनी होगी। सीडीएसएल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और अमित सिब्बल ने पैरवी की। उनके साथ वेरिटास लीगल और करंजावाला एंड कंपनी की टीम भी अदालत में मौजूद रही।
