रूस जब यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागता है, तो एयर डिफेंस सिस्टम के पास इस घातक खतरे का पता लगाने और उसे हवा में नष्ट करने के लिए केवल कुछ मिनट और कभी-कभी तो सिर्फ कुछ सेकंड का समय होता है। समय की इसी कमी के कारण कीव और यूक्रेन के अन्य शहर लगातार भीषण हमलों की चपेट में आ रहे हैं। हाल ही में राजधानी कीव में एक डिपो, वेयरहाउस और मेल-सॉर्टिंग ऑफिस पर हुए बैलिस्टिक हमले में कम से कम 17 लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
आखिर बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराना इतना कठिन क्यों है, पैट्रियट सिस्टम इनमें कैसे काम करता है और यूक्रेन इस संकट से निपटने के लिए क्या नए तरीके खोज रहा है? आइए इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।
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क्रूज व बैलिस्टिक मिसाइल में क्या है अंतर
क्रूज मिसाइलें बिना पायलट वाले विमान की तरह जमीन के समानांतर उड़ती हैं। इसके विपरीत, बैलिस्टिक मिसाइलों को रॉकेट की तरह ऊपर दागा जाता है और फिर वे ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बहुत सीधे कोण में नीचे गिरती हैं।
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रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ थॉमस विथिंगटन के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइल जब अपने निशाने की ओर बढ़ती है तो इसकी रफ्तार बहुत तेज होती है। इसे कैच खेलने के भौतिक नियम से समझा जा सकता है। अगर कोई गेंद आपकी तरफ बेहद तेज गति से आ रही है, तो उसे पकड़ना उतना ही मुश्किल हो जाता है।
रूस कौन सी घातक मिसाइलों का कर रहा है प्रयोग
रूस का मुख्य हथियार जमीन से दागी जाने वाली इस्कंदर-एम (Iskander-M) बैलिस्टिक मिसाइल है। इसके अलावा, हवा से दागी जाने वाली किंजल (Kinzhal) भी इसी श्रेणी में आती है। रूस अपने S-300 और S-400 एयर-डिफेंस मिसाइलों को भी जमीन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, जिरकॉन (Zircon) तकनीकी रूप से एक हाइपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है, लेकिन इसकी अत्यधिक रफ्तार बैलिस्टिक मिसाइल जैसी ही चुनौती पैदा करती है।
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पैट्रियट सिस्टम क्यों है अकेला सहारा
यूक्रेनी वायुसेना के प्रवक्ता यूरी इहनात की मानें तो यूक्रेन के पास मौजूद प्रणालियों में से केवल अमेरिका निर्मित पैट्रीट PAC-3 ही इस्कंदर-एम, S-400 और जिरकॉन जैसी मिसाइलों को हवा में रोक सकता है। पैट्रियट मिसाइल निशाने के पास फटने के बजाय सीधे आ रही मिसाइल के वारहेड से टकराकर उसे नष्ट कर देती है।
हालांकि, पैट्रियट भी शत-प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं है। यूक्रेन के पास पूरे देश और हर शहर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पैट्रियट बैट्रियां नहीं हैं। रूस अक्सर बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ क्रूज मिसाइलें, ड्रोन और नकली मिसाइलें मिलाकर दागता है, जिससे डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है और सीमित इंटरसेप्टर मिसाइलें जल्द खत्म हो जाती हैं।
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इंटरसेप्टर मिसाइलों की वैश्विक किल्लत
यूक्रेन में मिसाइलों की कमी एक वैश्विक संकट का हिस्सा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध के कारण पैट्रियट और थाड (THAAD) इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी खपत हुई है। एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिकी पैट्रियट का स्टॉक युद्ध-पूर्व स्तर से कम से कम 65% तक घट गया है। लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं और जर्मनी में भी नया प्लांट खुल रहा है, लेकिन उत्पादन तुरंत नहीं बढ़ाया जा सकता।
इसके अलावा, वाशिंगटन से मिलने वाले राजनीतिक संकेतों में भी बदलाव आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले यूक्रेन को पैट्रियट उत्पादन का लाइसेंस देने की बात कही, लेकिन बाद में कहा कि अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर लाइसेंस मिल भी जाए, तो यूक्रेन में उत्पादन शुरू होने में सालों लग जाएंगे। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन को पिछले साल की तुलना में केवल एक तिहाई एयर-डिफेंस मिसाइलें ही मिल पाई हैं।
नया स्वदेशी सिस्टम 'फ्रेया'
हवा में मिसाइल गिराने की सीमाओं को देखते हुए यूक्रेन अब मिसाइल दागे जाने से पहले ही उनके लॉन्चरों और बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की रणनीति अपना रहा है यानी तीर को रोकने के बजाय तीरंदाज को मारना। इसके लिए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एलन मस्क के स्टारलिंक संचार नेटवर्क का इस्तेमाल रूसी सीमा के अंदर ड्रोन हमलों के लिए करने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही, कीव पैट्रियट पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए 'फ्रेया' (Freya) नामक एक कम लागत वाला एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम विकसित कर रहा है।
