Indians in Russian army Dead Missing report: रूस की सेना में शामिल होने वाले भारतीय नागरिकों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ताजा स्थिति रिपोर्ट पेश की है। केंद्र ने बताया कि करीब 267 भारतीय रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए थे। इनमें से 51 की मौत हो चुकी है, जबकि 139 को सेवा से छुट्टी मिल गई है। भारतीय दूतावास रूस में भर्ती हुए 77 भारतीयों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए रूसी अधिकारियों के संपर्क में है। इनमें सात ऐसे लोग हैं, जिनके लापता होने की पुष्टि रूसी अधिकारियों ने की है। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र के जिला राजस्व अधिकारियों से भी 15 जुलाई 2026 के अपने पहले के आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई। मामले में केंद्र और संबंधित अधिकारियों से आगे की जानकारी और कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया है।
प्रभावित परिवारों के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने पर विचार करे MEA: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह प्रभावित भारतीयों के परिवारों को सहायता और मुआवजे के दावे करने के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक नोटिस जारी करने पर विचार करे। CJI ने कहा कि अदालत को बताया गया है कि विदेश मंत्रालय परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहा है और जरूरी दस्तावेज जुटाने में उनकी मदद कर रहा है। अदालत ने कहा कि मृतकों और लापता लोगों के परिवारों को मुआवजे का दावा करने का अवसर मिलना चाहिए।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार सभी जरूरी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला रूसी अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन भारत सरकार प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश कर रही है और रूस के साथ लगातार संपर्क में है।
कुछ परिवारों को मिला मुआवजा, DNA रिपोर्ट का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि छह परिवारों को मुआवजा मिल चुका है या भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अदालत के अनुसार, पांच परिवारों को पूरा मुआवजा मिला है, जबकि एक परिवार को आंशिक भुगतान हुआ है। इसके अलावा चार अन्य परिवारों ने सीधे रूसी अधिकारियों से मुआवजे की मांग की है।
DNA पहचान की प्रक्रिया पर केंद्र ने बताया कि गोकुल सिंह और दिनेश कुमार के DNA नमूने से जुड़ी रिपोर्ट राज्य अधिकारियों से मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने उन्हें रूसी अधिकारियों के साथ साझा किया है, ताकि पहचान की प्रक्रिया तेज की जा सके। हालांकि, कुछ मामलों में DNA रिपोर्ट अभी लंबित है। अदालत ने मृतकों के पार्थिव अवशेषों की पहचान और उन्हें भारत लाने में हो रही देरी पर भी ध्यान दिया।
रूसी सेना में भर्ती कराने वाले एजेंटों पर कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती कराने वाले एजेंटों के नाम, मोबाइल नंबर और पते अधिकारियों को दिए गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ जांच या कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने मांग की कि अगली स्थिति रिपोर्ट में बताया जाए कि इन एजेंटों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि याचिका दाखिल करने के बाद ही उनका विदेश मंत्रालय के साथ संपर्क हो पाया और परिवारों के साथ समन्वय बनाने में कठिनाई हुई। इस पर केंद्र ने कहा कि वह संबंधित परिवारों के संपर्क में है और रूस के अधिकारियों से लगातार जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
रूस जाने वाले भारतीयों के लिए विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि भारतीय दूतावास को ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ भारतीय काम, पढ़ाई या पर्यटन वीजा पर रूस पहुंचते हैं और साइनिंग बोनस तथा अन्य लाभों के लालच में सेना में शामिल हो जाते हैं। कुछ लोग भारत लौटाए जाने के बाद दोबारा रूस भी गए हैं। विदेश मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को एक एडवाइजरी जारी कर ऐसे कदमों के गंभीर जोखिम और जानलेवा परिणामों को लेकर फिर चेतावनी दी थी।
केंद्र ने यह भी बताया कि मंत्रालय ने लोगों को केवल ऐसे भर्ती एजेंटों पर भरोसा करने की सलाह दी है, जो मंत्रालय के साथ पंजीकृत हों। यह कदम कथित तौर पर गैर-पंजीकृत संस्थाओं और स्वयंसेवी समूहों के जरिए भर्ती किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद उठाया गया।
सिकंदर सिंह के मामले पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सिकंदर सिंह के मामले पर भी जानकारी ली। शुरुआत में उनके रूसी सेना में शामिल होने का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन केंद्र ने स्पष्ट किया कि वह रूसी सेना में सेवा नहीं दे रहे थे। उन्हें अप्रैल 2025 से छेड़छाड़ के आरोपों में हिरासत में रखा गया था और 12 फरवरी 2026 को रूस में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि केंद्र यह पता करेगा कि सिकंदर सिंह ने रूसी अदालतों में अपनी सजा के खिलाफ अपील की है या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि भारत में शेष सजा काटने की संभावना पर विचार किया जाए।
