कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से लेकर पति राजीव गांधी की हत्या तक के दर्दनाक अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि अगला निशाना राजीव गांधी होंगे। उन्होंने कहा, “मेरा विचार हमेशा यही रहता था कि अगला नंबर उनका होगा, उन्हें मार दिया जाएगा।”
सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू उनकी आने वाली संस्मरण किताब 'बिलांगिंग: ए जर्नी ऑफ लव (Belonging: A Journey of Love) के सिलसिले में हुआ है। यह किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। इंटरव्यू में उन्होंने निजी जिंदगी, गांधी परिवार में अपने शुरुआती दिनों, राजनीति में आने की अनिच्छा और देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर भी बात की।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद खून से लथपथ शरीर को गोद में रखा
सोनिया गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 का वह दिन याद किया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षा गार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्होंने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर वह इंदिरा गांधी के कार्यालय की तरफ दौड़ीं। वहां उन्होंने अपनी सास को खून से लथपथ जमीन पर पड़ा देखा।
सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी को अस्पताल ले जाते समय वह कार में उनके शरीर के पास बैठी थीं और उन्हें लगातार आवाज दे रही थीं, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी कई घंटे तक वह इस उम्मीद में रहीं कि शायद इंदिरा गांधी बच जाएं, लेकिन दोपहर करीब दो बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
सोनिया ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया, तो उन्हें यह बात किसी सदमे से कम नहीं लगी। उन्होंने राजीव से राजनीति में न जाने की गुहार लगाई थी।
'वे आपको भी मार देंगे', राजीव गांधी से की थी राजनीति छोड़ने की अपील
सोनिया गांधी ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार के भीतर डर का माहौल था। राहुल और प्रियंका की सुरक्षा के लिए उन्हें स्कूल से निकाल लिया गया था और घर में कमांडो तैनात कर दिए गए थे। परिवार की सामान्य जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी।
उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया, तो उन्होंने उनसे कहा था कि वह यह जिम्मेदारी न लें। सोनिया ने राजीव से कहा था, 'वे आपको भी मार देंगे।' लेकिन राजीव ने जवाब दिया था कि वे उन्हें वैसे भी मार देंगे।
सोनिया के मुताबिक, 1991 में उनकी आशंका सच साबित हुई। तमिल उग्रवादी संगठन लिट्टे के एक आत्मघाती हमलावर ने चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी। सोनिया ने यह भी कहा कि उन्हें आज तक लगता है कि राजीव गांधी की हत्या के पीछे की व्यापक साजिश का पूरा सच सामने नहीं आया।
इटली से भारत आने और राजीव गांधी से प्यार की कहानी भी बताई
सोनिया गांधी ने अपनी प्रेम कहानी के शुरुआती दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि राजीव भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं।
सोनिया ने राजीव को एक प्यार करने वाला, देखभाल करने वाला और भरोसा देने वाला इंसान बताया। उन्होंने कहा कि वह राजीव के लिए अपनी इतालवी पहचान तक छोड़ने को तैयार थीं। शादी के बाद भारत में शुरुआती जिंदगी को उन्होंने कई मायनों में सामान्य और खुशहाल बताया। हालांकि, इंदिरा गांधी की हत्या और फिर राजीव गांधी की मौत ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
इमरजेंसी को बताया गलती
सोनिया गांधी ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल यानी इमरजेंसी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी लगाना गलती थी। उनके मुताबिक, परिवार में भी इस फैसले को लेकर मतभेद थे।
सोनिया ने अपनी किताब में लिखा है कि राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां को अगला चुनाव होने तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, संजय गांधी का रुख इससे अलग था। सोनिया गांधी के अनुसार, संजय गांधी का प्रभाव इंदिरा गांधी पर काफी था और उन्हें लगता है कि अगर संजय को नियंत्रण में रखा जाता तो बाद में हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
मोदी सरकार पर साधा निशाना
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने मोदी को एक ऐसी 'सत्तावादी ताकत' बताया, जो देश की प्रकृति बदलना चाहती है। सोनिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया है।
उन्होंने कहा कि संसद में अब विपक्ष को अपनी बात रखने और बहस करने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। सोनिया के मुताबिक, पहले सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत और विचार-विमर्श होता था, लेकिन अब विपक्ष की भूमिका को महत्व नहीं दिया जा रहा है। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें युवा पीढ़ी के विरोध प्रदर्शनों से उम्मीद दिखाई देती है। उनके अनुसार, युवा गलत चीजों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और यह बदलाव का संकेत हो सकता है।
किताब के प्रकाशन को लेकर भी हुआ विवाद
सोनिया गांधी ने बताया कि उनकी संस्मरण पुस्तक के भारतीय संस्करण को लेकर भी परेशानी आई। उनके अनुसार, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने शुरुआत में किताब प्रकाशित करने की योजना बनाई थी, लेकिन सरकार की आलोचना से जुड़े कुछ संपादकीय सुझावों पर सहमति नहीं बनने के बाद प्रकाशन की योजना आगे नहीं बढ़ी।
हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा कि किताब प्रकाशित न करने के फैसले को सोनिया गांधी की ओर से संपादकीय बदलावों से इनकार करने से जोड़ना सही नहीं है। अब यह किताब दूसरे प्रकाशक के जरिए प्रकाशित होगी।
बता दें कि सोनिया गांधी ने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनना उनके मन में कभी नहीं था। उनकी किताब में प्यार, परिवार, राजनीतिक जीवन, निजी दुख और गांधी परिवार से जुड़े कई अनकहे पहलुओं का जिक्र है।
