संचार साथी ऐप पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया का अहम बयान (PTI)
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा कि ‘संचार साथी’ ऐप के माध्यम से न तो जासूसी (स्नूपिंग) संभव है और ना होगी। सिंधिया ने सभी नए मोबाइल उपकरणों में साइबर सुरक्षा के लिहाज से इस ऐप को प्रीलोड करने के सरकार के निर्देश पर उठे विवाद के बीच लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि संचार साथी ऐप के आधार पर न स्नूपिंग संभव है, न होगी। सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की जनता के हाथ में अधिकार देना चाहती है ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि जनता की प्रतिक्रिया पर मिली सफलता के आधार पर यह प्रयोग किया गया है और भविष्य में जनता के ही सुझावों के आधार पर सरकार इसमें बदलाव के लिए तैयार है।
संचार मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का इस बारे में कोई हठ नहीं है। संचार मंत्रालय के 28 नवंबर के आदेश में सभी मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं को सभी नए हैंडसेट में अनिवार्य रूप से संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करने को कहा गया है और मौजूदा मोबाइल फोन पर अपडेट के माध्यम से इसे इंस्टॉल करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस आदेश पर विवाद शुरू हो गया। मंगलवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कुछ विपक्षी सदस्यों ने इसे अनिवार्य किए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे सरकार की निगरानी के बिना निजी संदेश भेज सकें।
इस पर सफाई देते हुए सिंधिया ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में कहा कि इस ऐप को भी मोबाइल पर अन्य ऐप की तरह हटाया जा सकता है। उन्होंने बुधवार को सदन में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग और धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाने की सोच के साथ 2023 में ‘संचार साथी’ पोर्टल की शुरुआत की गई थी और 2025 में इसके लिए ऐप का प्रयोग शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि इस ऐप से जनभागीदारी के आधार पर साइबर धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाना और मोबाइल चोरी की घटनाओं को कम करना ही उद्देश्य है।
सिंधिया ने कहा कि पोर्टल पर जनता की अच्छी प्रतिक्रिया के आधार पर ही सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर जनता की प्रतिक्रिया से चोरी के लाखों मोबाइल फोन का पता चला, वहीं धोखाधड़ी के छह लाख मामलों को रोका जा सका। सिंधिया ने साफ किया कि संचार साथी ऐप के माध्यम से नागरिकों को विकल्प दिया गया है और जब तक वे इस पर पंजीकरण नहीं करते, उनके मोबाइल में यह काम नहीं करेगा। उन्होंने कहा, पूरा अधिकार नागरिक का है। हमने केवल सभी को यह ऐप उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाया है।
सरकार के साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी’ के डाउनलोड में मंगलवार को 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसका औसत दैनिक डाउनलोड 60,000 से बढ़कर करीब छह लाख हो गया। दूरसंचार विभाग के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसे डाउनलोड करने में तेजी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी नेताओं और उद्योग विशेषज्ञों के एक वर्ग ने सभी मोबाइल फोन पर ऐप को अनिवार्य रूप से पहले से होने (इंस्टॉल) के दूरसंचार विभाग के आदेश की आलोचना की। उनका आरोप है कि यह एक तरह की जासूसी और नागरिकों की गोपनीयता का उल्लंघन है।
दूरसंचार विभाग के एक सूत्र ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पीटीआई-भाषा से कहा कि ‘संचार साथी’ ऐप को जनता से अचानक बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। एक दिन में डाउनलोड की संख्या औसतन 60,000 से 10 गुना बढ़कर करीब छह लाख हो गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आदेश जारी होने से पहले ही 1.5 करोड़ लोग इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं। दूरसंचार विभाग ने मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं एवं आयातकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि धोखाधड़ी की सूचना देने वाला उसका ऐप ‘संचार साथी’, सभी नए उपकरणों में पहले से मौजूद हों और मौजूदा उपकरणों पर सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से इसे मुहैया कराया जाए।
विभाग के 28 नवंबर के निर्देश के अनुसार, आदेश जारी होने की तारीख से 90 दिन के बाद भारत में विनिर्मित या आयातित होने वाले सभी मोबाइल फोन में यह ऐप होना अनिवार्य होगा। सभी मोबाइल फोन कंपनियों का 120 दिन के भीतर दूरसंचार विभाग को अनुपालन रिपोर्ट देना आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हालांकि मंगलवार को कहा कि था धोखाधड़ी की सूचना देने वाले ऐप ‘संचार साथी’ को उपयोगकर्ता जब चाहे हटा सकते हैं। उपयोगकर्ता ऐप को रखने या इसे हटाने का निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं।
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