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आरएसएस के 100 साल कंपलीट, संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले-एकता के लिए एकरूपता की जरूरत नहीं |

भागवत ने कहा कि हम एकता के लिए एकरूपता को जरूरी नहीं मानते; विविधता में भी एकता है। विविधता, एकता का ही परिणाम है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत आज़ादी के 75 वर्षों में वह वांछित दर्जा हासिल नहीं कर सका जो उसे मिलना चाहिए था। आरएसएस का उद्देश्य देश को "विश्वगुरु" बनाना है और दुनिया में भारत के योगदान का समय आ गया है

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आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधित किया (फोटो-ANI)

दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश को संबोधित किया। उन्होंने देश में एकजुटता का संदेश देते हुए भागवत ने एकता के लिए एकरूपता की जरूरत को नकारते हुए मंगलवार को कहा कि विविधता में भी एकता है और विविधता एकता का ही परिणाम है। उन्होंने हिंदुओं को भूगोल और परंपराओं की व्यापक रूपरेखा में परिभाषित किया और कहा कि कुछ लोग जानते हैं, लेकिन खुद को हिंदू नहीं मानते, जबकि कुछ अन्य इसे नहीं जानते।

वह यहां विज्ञान भवन में आयोजित "आरएसएस की 100 वर्ष यात्रा: नए क्षितिज" विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की विषयवस्तु भौगोलिक नहीं है, बल्कि "भारत माता" के प्रति समर्पण और पूर्वजों की परंपरा है जो सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा, "हमारा डीएनए भी एक है... सद्भावना से रहना हमारी संस्कृति है।भागवत ने कहा कि हम एकता के लिए एकरूपता को जरूरी नहीं मानते; विविधता में भी एकता है। विविधता, एकता का ही परिणाम है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत आज़ादी के 75 वर्षों में वह वांछित दर्जा हासिल नहीं कर सका जो उसे मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य देश को "विश्वगुरु" बनाना है और दुनिया में भारत के योगदान का समय आ गया है।

उन्होंने देश के उत्थान के लिए सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने कहा, "अगर हमें देश का उत्थान करना है, तो यह किसी एक पर काम छोड़ देने से नहीं होगा। हर किसी की अपनी भूमिका होगी।" उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं, सरकारों और राजनीतिक दलों की भूमिका इस प्रक्रिया में सहायता करना है। लेकिन मुख्य कारण समाज का परिवर्तन और उसकी क्रमिक प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही भारतीयों ने कभी लोगों के बीच भेदभाव नहीं किया, क्योंकि वे यह समझते थे कि सभी और विश्व एक ही दिव्यता से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि "हिंदू" शब्द का प्रयोग बाहरी लोग भारतीयों के लिए करते थे।

उन्होंने कहा कि हिंदू अपने मार्ग पर चलने और दूसरों का सम्मान करने में विश्वास रखते हैं तथा वे किसी मुद्दे पर लड़ने में नहीं, बल्कि समन्वय में विश्वास रखते हैं। इससे पहले, आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार एवं मीडिया प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि मंगलवार से शुरू हुई तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान भागवत समाज के प्रमुख लोगों के साथ "संवाद" करेंगे और देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

कौन-कौन हुआ शामिल?

संघ के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में योग गुरु रामदेव, जनता दल (यूनाइटेड) नेता के सी त्यागी, अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत, तथा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं अनुप्रिया पटेल मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे |

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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