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'एक और राजपूत सितारा चला गया...' रविंद्र भाटी को मिली जान से मारने की धमकी, बाद में गैंगस्टर रोहित गोदारा ने दी सफाई

Ravindra Singh Bhati: रोहित गोदारा के नाम से बने एक फेसबुक अकाउंट पर रविंद्र भाटी को धमकी देते हुए लिखा गया था कि मैं रविंद्र सिंह भाटी को स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि यदि इसी तरह उछलने की कोशिश की तो यह दिन दूर नहीं होगा कि लोग कहेंगे एक और राजपूत सितारा चला गया।

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रविंद्र सिंह भाटी

Photo : Twitter

Ravindra Singh Bhati: राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी को जान से मारने की धमकी मिली है। यह धमकी कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग के गुर्गे रोहित गोदारा के नाम से दी गई थी। हालांकि, अब रोहित गोदारा ने ऐसी किसी भी धमकी देने से ही इनकार कर दिया है। उनसे कहा है कि इस मामले से उसका कोई लेना-देना नहीं है, उसके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है।

रोहित गोदारा ने एक लंबा फेसबुक पोस्ट लिखकर सफाई भी दी है, यहां तक कि पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। गोदारा ने कहा है कि उसके नाम से किसी दूसरे शख्स ने यह काम किया है। उसका कहना है कि सत्ता में बैठे कुछ लोग निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र भाटी को दबाना चाहते हैं, इसलिए उसके नाम का इस्तेमाल कर रविंद्र भाटी को धमकी दिला रहे हैं।

क्या दी गई थी रविंद्र भाटी को धमकी

रोहित गोदारा के नाम से बने एक फेसबुक अकाउंट पर रविंद्र भाटी को धमकी देते हुए लिखा गया था कि मैं रविंद्र सिंह भाटी को स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि यदि इसी तरह उछलने की कोशिश की तो यह दिन दूर नहीं होगा कि लोग कहेंगे एक और राजपूत सितारा चला गया। हम तो चुनाव से पहले ही बहुत कुछ बदल सकते थे लेकिन मेरे लोगों में उम्मेदाराम बेनीवाल जी के कांग्रेस में जाने की निराशाजनक स्थिति के कारण ही रविंद्र सिंह भाटी इस लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रह पाया, वरना हमने तो बड़े बड़ों को भी कई बार नहीं अनेकों बार पैरों के नीचे रखा है। हमको न तो कोई चुनाव लड़ना है और न कोई सत्ता का शौक है। हम चाहते हैं कि हमारी कौम के ऊपर कोई गलत नजरिए से देखने की हिम्मत भी नहीं करें।

कौन है रोहित गोदारा

रोहित गोदारा राजस्थान के बीकानेर के लूणकरण का रहने वाला है। उस पर गंभीर उपराध के करीब 32 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, वो 2010 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। वह राजस्थान में बड़े-बड़े कारोबारियों से 5 करोड़ से लेकर 17 करोड़ तक की रंगदारी मांग चुका है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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