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Rajkot Game Zone Fire: शवों की शिनाख्त के लिए इकट्ठे किए गए DNA सैंपल, जानिए 27 लापता लोगों के नाम

Rajkot Fire: राजकोट 'गेम जोन' आग्निकांड में अब तक 27 लापता लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि घटनास्थल से बरामद हुए शवों की शिनाख्त अभी नहीं हो सकी है। आग से बुरी तरह जल जाने की वजह से शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए के नमूने एकत्र किए गए हैं। वहीं एसआईटी ने की मामले की जांच तेज कर दी है और बैठक की।

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शवों की शिनाख्त में आ रही हैं मुश्किलें।

Photo : Times Now Digital

Gujarat News: गुजरात के राजकोट शहर में एक ‘गेम जोन’ में भीषण आग लगने से चार बच्चों समेत 25 से अधिक लोगों की मौत के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्यों ने रविवार तड़के यहां स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक की। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि मौत के आंकड़े 27 के पार पहुंच गया है। वहीं ‘गेम जोन’ के मालिक और प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

शवों की शिनाख्त में आ रही हैं मुश्किलें

अधिकारियों ने बताया कि शव बुरी तरह से जले हुए हैं और उनकी शिनाख्त में मुश्किलें आ रही हैं इसके लिए शवों और मारे गए लोगों के परिजन के डीएनए के नमूने एकत्र किए गए हैं। DNA सैंपल की जांच के बाद ही ये बात सामने आ पाएगी कि किस व्यक्ति का शव कौन है। राजकोट अग्निकांड में लापता 27 लोगों की सूची सामने आई है। नीचे देखें लिस्ट।

राजकोट अग्निकांड में लापता 27 लोगों की सूची

  1. नम्रजीत सिंह जयपाल सिंह जाडेजा
  2. प्रकाश भाई पांचाल
  3. वीरेंद्र सिंह जाडेजा
  4. धर्मराज सिंह जाडेजा
  5. देवांशी जड़ेजा
  6. सुनील भाई सिद्धपुरा
  7. ओमदेव सिंह गोहिल
  8. अक्षत धोलरिया
  9. ज्योति बेन सांवलिया
  10. हरिताबेन सांवरिया
  11. विश्वराज सिंह जाडेजा
  12. कल्पेश भाई बागड़ा
  13. सुरपाल सिंह जाडेजा
  14. नीरव वेकारिया
  15. सत्यपाल सिंह जाडेज
  16. शत्रुघ्न सिंह चुडासमा
  17. जयन्त गोटेचा
  18. सुरपाल सिंह जाडेजा
  19. नम्रजीत सिंह जाडेजा
  20. नितेश जाधव
  21. ओम देव सिंह चुडासमा
  22. वीरेन्द्र सिंह
  23. कथाड आशा बेन चंदूभाई
  24. राजभा चौहान
  25. रमेश कुमार
  26. सत्यपाल सिंह जाडेजा
  27. मोनू केशव गौड़

सीएम भूपेंद्र पटेल ने किया अस्पताल का दौरा

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने रविवार सुबह नाना-मावा रोड पर घटनास्थल और एक अस्पताल का दौरा किया जहां घायल व्यक्तियों को भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ‘गेम जोन’ के मालिक और प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार शनिवार शाम ‘गेम जोन’ में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई जिसमें 12 साल से कम उम्र के चार बच्चे भी शामिल हैं।

पांच सदस्यीय एसआईटी ने जांच की तेज

घटना की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय एसआईटी शनिवार देर रात राजकोट पहुंची और स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक की। एसआईटी को 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी भी शनिवार देर रात राजकोट पहुंचे और बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री से घटना की जानकारी मांगी है और इस घटना पर दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।’’

एसआईटी के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुभाष त्रिवेदी ने बैठक से पहले शनिवार रात संवाददाताओं से कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। उन्होंने कहा कि दोषियों का पता लगाने के लिए जांच तत्काल प्रांरभ की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो।

(इनपुट- एजेंसी)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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