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Poonch Terror Attack: पाकिस्तान से ऑपरेट हुआ था पुंछ हमले का पूरा प्लान! साजिद जट था मास्टरमाइंड, सर्च ऑपरेशन तेज

Poonch Terror Attack News and Update: खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पुंछ में वायु सेना के काफिले पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड साजिद जट था, जो पाकिस्तान या पीओके से ऑपरेशन को अंजाम देता है। वहीं, शक की सुई लश्कर-ए-तैयबा के विदेशी आतंकवादी अबू हमजा की तरफ भी घूमी हुई है।

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पुंछ आतंकी हमला

Photo : Twitter

Poonch Terror Attack News and Update: जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हुए हमले का पूरा प्लान पाकिस्तान या फिर पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर से ऑपरेट हुआ था। सेना की ओर से अब तक की जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ हो सकता है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड साजिद जट था, जो पाकिस्तान या पीओके से ऑपरेशन को अंजाम देता है। वहीं, शक की सुई लश्कर-ए-तैयबा के विदेशी आतंकवादी अबू हमजा की तरफ भी घूमी हुई है। बहरआल, सेना के जवानों ने आतंकियों की धरपकड़ के सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया है।

बता दें, पुंछ की सुरनकोट तहसील के बकराबल (सनाई) इलाके में हुए इस आतंकी हमले में वायुसेना के कॉर्पोरल विक्की पहाड़े शहीद हो गए थे और 4 अन्य वायु सेना के जवान घायल हो गए। इसके बाद वायु सेना के जवानों ने पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान शुरू किया है। इस हमले के आरोप में कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों का सफाया करने के लिए शाहसितार, गुरसाई, सनाई और शीनदारा टॉप समेत कई इलाकों में सेना व पुलिस का संयुक्त अभियान जारी है। हालांकि, अभी तक आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच कोर्ठ संपर्क नहीं हुआ है।

एम4 कार्बाइन व असॉल्ट राइफलों का हुआ इस्तेमाल

सेना के अधिकारियों ने बताया कि वायु सेना के काफिले पर घात लगाकर किए हमले में आतंकवादियों ने एके असॉल्ट राइफलों के अलावा अमेरिका निर्मित एम4 कार्बाइन और स्टील की गोलियों का भी इस्तेमाल किया था। माना जा रहा है कि हमले के बाद आतंकी जंगलों की ओर भाग गए। हमले के मद्देनजर स्थानीय पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों सहित सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। सेना ने एक हेलीकॉप्टर का उपयोग करके हवाई निगरानी भी की और पैरा कमांडो को भी तलाशी अभियान में लगाया गया।

21 दिसंबर, 2023 के बाद पुंछ में पहला हमला

शनिवार का हमला 21 दिसंबर, 2023 के बाद पुंछ में पहला हमला था, जब जिले के बफलियाज के डेरा की गली इलाके में एक आतंकवादी हमले में सेना के 4 जवान मारे गए थे। पुलिस के मुताबिक, अबू हमजा 22 अप्रैल को राजौरी जिले के थानामंडी इलाके के कुंडा टॉप गांव में 40 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मोहम्मद रज्‍जाक की हत्या के लिए भी जिम्मेदार है। रज्‍जाक समाज कल्याण विभाग में कार्यरत थे, जबकि उनके भाई मोहम्मद ताहिर चौधरी प्रादेशिक सेना में कार्यरत हैं। पुलिस ने बताया कि आतंकवादी सैनिक को मारने आए थे, लेकिन जब वह उनके चंगुल से छूट गया तो उन्होंने उसके भाई को मार डाला। पुलिस ने पुंछ और राजौरी जिलों के घने जंगली इलाके में सक्रिय इस विदेशी आतंकवादी का पता लगाने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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