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गोवा पुलिस की कस्‍टडी से फरार हुए आरोपी को लेकर फिर गरमाई सियासत, विपक्ष ने सरकार को घेरा

Goa Police vs Opposition: हाल ही में एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, जिसमें ये देखा गया था कि गोवा में एक कॉन्सटेबल ने कैसे एक आरोपी को पुलिस कस्टडी से भगा दिया था। अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस को घेरा है। तो वहीं डीजीपी आलोक कुमार ने आश्वासन दिया कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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जब कॉन्सटेबल के साथ पुलिस कस्टडी से फरार हुआ आरोपी।

Goa Politics: गोवा में लगातार विवादित मामले सामने आ रहे हैं। विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बदस्तूर जारी है। पहले कैश फॉर जॉब स्कैम में विपक्ष ने सरकार को घेरा और खुद सीएम प्रमोद सावंत ने जवाब दिया। इसके बाद पुलिस कस्टडी से एक आरोपी कॉन्सटेबल की मदद से फरार हो गया, तो फिर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाया। इस बीच भागे हुए आरोपी को लेकर एक बार फिर सियासत गरमाती दिख रही है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी लगातार सरकार पर गंभीर इल्जाम लगा रही है। हालांकि गोवा पुलिस के डीजीपी ने साफ कर दिया है कि जो जिम्मेदार है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

पुलिस कस्टडी से आरोपी के फरार के आब अब क्यों गरमाई सियासत?

हाल ही में गोवा में जमीन हड़पने के मामलों में आरोपी एक व्यक्ति कांस्टेबल की मदद से पुलिस हिरासत से भाग गया था। ये पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार और सिस्टम पर सवाल खड़ा किया था। पुलिस अधीक्षक (क्राइम ब्रांच) राहुल गुप्ता ने उस वक्त बताया था कि लगभग साढ़े चार साल तक फरार रहे सिद्दीकी सुलेमान खान को 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और वह बीते 12 दिसंबर को देर रात करीब ढाई बजे अपराध शाखा की हिरासत से भाग गया। उन्होंने बताया था कि अपराध शाखा की विशेष जांच टीम ने जमीन हड़पने के तीन मामलों में 12 नवंबर को खान को गिरफ्तार किया था। गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि वह भगोड़ा अपराधी था और पिछले 30 दिन से अपराध शाखा की हिरासत में था। अब कांग्रेस पार्टी के गोवा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कवथंकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। आपको तफसील से समझाते हैं कि आखिर किसने क्या आरोप लगाया और किसने क्या जवाब दिया।

कांग्रेस नेता की पोस्ट के बाद विपक्ष ने पुलिस और सरकार को घेरा

कांग्रेस के गोवा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कवथंकर ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि "जमीन कब्जे के आरोपी सुलेमान खान ने क्राइम ब्रांच की कस्टडी से पुलिस की पूरी सुरक्षा में फरार होने के बाद जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और गंभीर हैं। इस तरह के आरोपों के बाद यह सवाल उठता है कि क्या गोवा में पुलिस, अपराधी और राजनीतिक गठजोड़ की कोई नई परिभाषा सामने आ रही है? यह गठजोड़ राज्य में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने का काम कर रहा है। गोवा में कानून व्यवस्था पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और राज्य सरकार की ओर से इसके समाधान की कोई पहल नहीं की जा रही है। कांग्रेस पार्टी इस स्थिति पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से इस्तीफा देने की मांग करती है, क्योंकि वह राज्य के गृह मंत्री भी हैं और इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।"

एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें फरार आरोपी सिद्दीकी सुलेमान कई बड़े दावे कर रहा है। इस वीडियो को कांग्रेस नेता ने पोस्ट किया है। इसी के बाद गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष और विधायक विजय सरदेसाई ने ट्विटर पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर निशाना साधते हुए लिखा, "मैं मुख्यमंत्री से गोवा के उद्धारक बनने की अपील करता हूं; अपना पद छोड़ें। गोवा को और कितना तबाह करेंगे? जैसे-जैसे जमीन कब्जे के नए-नए खुलासे हो रहे हैं, यह साफ है कि बीजेपी शासन में भ्रष्टाचार ने प्रशासन के हर अंग को अपनी चपेट में ले लिया है। इस भ्रष्टाचार में गोवा पुलिस और राजनीति दोनों ही शामिल हैं, और यह स्थिति हर किसी के लिए चिंता का विषय बन गई है।"

गोवा पुलिस महानिदेशक ने दिया कार्रवाई का भरोसा

गोवा के डीजीपी आलोक कुमार ने कहा, "सुलेमान सिद्दीकी नामक एक शीर्ष अपराधी, जिसका नाम गोवा और महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों में भूमि हड़पने और कई अन्य मामलों में भी है, लंबे समय से फरार था और तीन-चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद, अपराध शाखा ने उसे नवंबर में गिरफ्तार कर लिया। जब वह हिरासत में था, तो वह एक कांस्टेबल की मदद से फिर से फरार हो गया। कई टीमें उसे फिर से गिरफ्तार करने के लिए काम कर रही हैं। कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।"

वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि फिलहाल उनका मुख्य ध्यान आरोपी को फिर से गिरफ्तार करने पर है। उन्होंने कहा, "जांच जारी है और सिद्दीकी खान को फिर से गिरफ्तार करने के लिए डीआईजी की निगरानी में कई टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। हमारे पास पक्के सुराग और सुराग हैं और हमें उम्मीद है कि हम उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लेंगे।"

सीएम प्रमोद सावंत ने विपक्ष को सुनाई खरी-खोटी

इस पूरे विवाद पर खुद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'विपक्ष ने जमीन हड़पने के मामले में सरकार की एसआईटी का मजाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन सिद्दीकी की गिरफ्तारी पर चुप रहे। हमारी सरकार ने इस अपराधी के खिलाफ कार्रवाई की है और हम उसे न्याय के कटघरे में लाएंगे।'

AAP ने गोवा के डीजीपी और सरकार पर साधा निशाना

वहीं आम आदमी पार्टी के गोवा प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है और डीजीपी आलोक कुमार पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए अपने पोस्ट में लिखा कि 'गोवा के डीजीपी से अनुरोध है कि कृपया पूछें कि कल रात 3:00 बजे तक रीबानगर में SP क्राइम क्या कर रहे थे? क्या इसका सबूतों या CCTV से कोई लेना-देना है। अगर सब ठीक है और अगर गोवा पुलिस और SP क्राइम साफ हैं, तो गोवा के डीजीपी को सिर्फ 11/12/2024 और 12/12/2024 के CCTV फुटेज ही जारी करने चाहिए, पूरे क्राइम ब्रांच परिसर के। मीडिया द्वारा इसे जारी करने से पहले ही ऐसा कर दें, पिछली बार पुलिस ने किस तरह से चुनिंदा तरीके से ऐसा किया था।'

उन्होंने एक अलग पोस्ट में लिखा कि 'SIT आरोपी सुलेमान ने अपने वीडियो में जिन लोगों के नाम लिए हैं, उनकी जांच करने के बजाय, ओल्ड गोवा पुलिस ने कांग्रेस नेता सुनील कवथंकर को तलब किया है और मुझे बताया गया है कि मैं अगली कतार में हूं। समन का इंतजार करूंगा। वाह गोवा पुलिस आपको और गोवा के डीजीपी को सलाम। SP क्राइम, सूरज और अन्य लोगों का क्या? CCTV फुटेज का क्या?'

सिद्दीकी सुलेमान खान के पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद से प्रशासन और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने प्रशासन और सरकार दोनों पर हमलावर है। देखना होगा कि ये दिलचस्प मामला आगे क्या मोड लेता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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