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पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के DA पर सियासी घमासान! 'हक' बनाम 'खजाना खाली' की जंग

बीजेपी का आरोप है कि भगवंत मान सरकार 'वित्तीय संकट' और 'खाली खजाने' का हवाला देकर कर्मचारियों के लंबित DA का भुगतान टाल रही है।

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पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के DA पर सियासी घमासान (प्रतीकात्मक फोटो)

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर सियासत तेज हो गई है। पंजाब बीजेपी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के इतिहास में पहली बार कर्मचारियों को उनका वैधानिक महंगाई भत्ता देने से इनकार किया जा रहा है।

बीजेपी का आरोप है कि भगवंत मान सरकार 'वित्तीय संकट' और 'खाली खजाने' का हवाला देकर कर्मचारियों के लंबित DA का भुगतान टाल रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार कर्मचारियों के अधिकारों का हनन कर रही है, जबकि दूसरी ओर विज्ञापनों और वीआईपी सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

बीजेपी ने दावा किया कि पंजाब सरकार पश्चिम बंगाल की सरकार की उसी कानूनी दलील को दोहरा रही है, जिसके तहत वहां भी लंबे समय तक कर्मचारियों को DA से वंचित रखा गया था। पार्टी का कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस तर्क को स्वीकार नहीं किया है।

बीजेपी के अनुसार, मार्च 2026 में Justice Harpreet Singh Brar ने Surinder Singh v. State of Punjab मामले में स्पष्ट कहा था कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है, न कि सरकार की ओर से दिया जाने वाला कोई अनुग्रह। अदालत ने राज्य सरकार को लंबित DA का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने का निर्देश भी दिया था।

बीजेपी अध्यक्ष का वादा

पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि यदि 2027 में राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है तो कर्मचारियों के लंबित DA का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि युवाओं के लिए पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू की जाएगी।

केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब हाईकोर्ट में कर्मचारियों को उनका अधिकार देने के बजाय बहाने बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी अभी भी अपने लंबित महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार पर भेदभाव का आरोप

बीजेपी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सामान्य कर्मचारियों को DA का भुगतान नहीं कर रही, जबकि वरिष्ठ अधिकारियो-जैसे IAS, IPS, IFS और न्यायिक अधिकारियो-को उनके देय भुगतान दिए जा रहे हैं। पार्टी ने इसे कर्मचारियों के साथ भेदभाव बताते हुए कहा कि यह उनके वैधानिक अधिकारों को छीनने की सुनियोजित कोशिश है।

हालांकि, इस पूरे मामले पर पंजाब सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीजेपी के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर स्पष्ट होगी।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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