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मोदी-शाह के करीबी रहे डी जी वंझारा का राजीनितिक अवतार, क्या चुनाव में डाल पाएंगे असर

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Nov 9, 2022, 11:12 AM IST

तुलसी राम प्रजापति एनकाउंटर से सुर्खियों में आए पुलिस अधिकारी डी जी वंझारा ने प्रजा विजय पार्टी बनाई है। वो अपने आपको हिंदू विचारधारा का वाहक बता रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या गुजरात विधानसभा चुनाव में वो किसी तरह का असर डाल पाएंगे।

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डी जी वंझारा, अध्यक्ष, प्रजा विजय पार्टी

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • गुजरात में दो चरणों में चुनाव
  • 1 और 5 दिसंबर को मतदान
  • 8 दिसंबर को मतगणना

गुजरात में नरेंद्र मोदी सीएम थे उस समय एक पुलिस अधिकारी हुआ करते थे डी जी वंझारा। वंझारा के बारे में कहा जाता था कि वो मोदी और शाह दोनों के करीबी थे। तुलसी राम प्रजापति एनकाउंटर केस में उनका नाम सामने आया कि उन्होंने गैर कानूनी तरीके से मुठभेड़ को अंजाम दिया था। वंझारा उस केस में जेल में भी रहे। हालांकि कानूनी लड़ाई में वो बेदाग बरी होकर निकले। सेवा से अवकाश के बाद उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए जनसेवा की बात कही। हालांकि अब उनका राजनीतिक चेहरा सामने आ चुका है। प्रजा विजय पार्टी के उनके दल का नाम है और 2022 के चुनाव में सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वंझारा खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं इसके बारे में उन्होंने खुलासा नहीं किया है।

सभी 182 सीटों पर वंझारा की पार्टी लड़ेगी चुनाव

वंझारा का कहना है कि राज्य में बीजेपी के विकल्प के तौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी खुद को पेश कर रही है।लेकिन सच ये है कि ये दोनों दल 27 साल से गुजरात पर शासन कर रही बीजेपी को कड़ी टक्कर देने में नाकाम साबित होंगे। इन दोनों दलों के पास विचारधारा की कमी है। वो अपने दल के बारे में बताते हैं कि पिछले तीन साल से वो जमीन पर काम कर रहे हैं और गुजरात के लोगों की असली समस्या क्या है उसे समझते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपनी पार्टी सिर्फ इसलिए बनाई कि बीजेपी ने टिकट देने के इनकार कर दिया था तो उस सवाल के जवाब में कहा कि वो ऐसे शख्स नहीं है जो पार्टी के लिए कतार में खड़े हों।

क्या कहते हैं जानकार

अब सवाल यह है कि क्या वंझारा की पार्टी बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी करेगी। या वंझारा इतिहास बन कर रह जाएंगे। जानकारों का कहना है कि पुलिस अधिकारी के तौर पर अपने फर्ज को अंजाम देना और नेता बनकर जनता के बीच रहना दोनों में फर्क होता है। वंझारा जिस समाज से आते है उसे वो कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं लेकिन यह बात नहीं भूलनी चाहिए उसी समाज के कई बीजेपी नेता हैं जो सक्रिय तौर पर काम करते रहे हैं। वंझारा कुछ हद तक सनसनी पैदा कर सकते हैं। लेकिन उसका असर ईवीएम की मशीनों पर पड़ेगा उसकी संभावना कम है।

ललित राय
ललित रायauthor

खबरों को सटीक, तार्किक और विश्लेषण के अंदाज में पेश करना पेशा है। पिछले 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव है।

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