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PM Modi की हिदायत: INDIA vs BHARAT विवाद पर न बोलें, सनातन धर्म पर तथ्यों के साथ बात करें केंद्रीय मंत्री

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 6, 2023, 04:04 PM IST

INDIA vs BHARAT: पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों से कहा है कि वे उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान पर सही तरीके और तथ्यों के साथ जवाब दें और INDIA vs BHARAT विवाद पर मंत्रियों को न बोलने की हिदायत दी है।

INDIA vs BHARAT: देश की राजनीति में इन दिनों दो मुद्दों को लेकर भूचाल आया हुआ है। एक तरफ INDIA vs BHARAT विवाद पर भाजपा पर पूरा विपक्ष हमलावर है तो दूसरी तरफ सनातन धर्म विवाद पर भारतीय जनता पार्टी विपक्षी गठबंधन INDIA पर निशाना साध रही है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को सख्त हिदायत दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों से कहा है कि वे उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान पर सही तरीके और तथ्यों के साथ जवाब दें। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने INDIA vs BHARAT विवाद पर मंत्रियों को न बोलने की हिदायत दी है।

क्या है सनातन धर्म विवाद

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे व सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पिछले दिनों सनातन धर्म को लेकर बयान दिया था। उन्होंने सनातन उन्मूलन सम्मेलन में कहा था कि सनातन का सिर्फ विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे समाप्त ही कर देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जा सकता है, उन्हें खत्म ही कर देना चाहिए। जिस तरह से हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं कर सकते, इसे मिटा ही सकते हैं। ऐसे ही सनातन को भी हमें मिटाना है।

INDIA vs BHARAT विवाद क्या है

बीते दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने बयान दिया था कि हमें देश को इंडिया की जगह भारत कहना चाहिए। इसके बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि केंद्र सरकार आधिकारिक तौर पर देश का नाम INDIA के बजाय भारत कर सकती है। हालांकि, यह मुद्दा तब तूल पकड़ा, जब जी-20 सम्मेलन को लेकर राष्ट्रपति भवन की ओर से रात्रिभोज का निमंत्रण भेजा गया। इसमें 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा गया, जिसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने गुपचुप तरीके से देश का नाम बदल दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार संविधान से INDIA शब्द को हटाने से संबंधित बिल भी ला सकती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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