वर्तमान में आक्रमक चुनावी माहौल के बीच दिल्ली से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो राजनीतिक माहौल से इतर की कहानी बयां कर रही है। दरअसल संसद भवन में बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती (Ambedkar Jayanti 2026) के लिए उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। जहां पीएम मोदी (PM Modi), उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) समेत तमाम नेता पहुंचे थे। यहीं पर पीएम मोदी और खरगे बीच मुलाकात हुई और दोनों गर्मजोशी से मिले। बातें हुईं और ठहाके भी लगे।
पीएम मोदी और खरगे (फोटो- ANI)
जब खरगे से मिले पीएम मोदी
इस मौके का एक वीडियो भी सामने आया है। जहां पीएम मोदी उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन से मिलने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलते हैं। दोनों हाथ मिलाते हैं और फिर दोनों के बीच कुछ बातचीत होती है, बातचीत क्या हुई ये तो पता नहीं, लेकिन इसके बाद पीएम मोदी खिलखिला उठे, हंसने लगे। खरगे भी हंसते दिखे।
प्रधानमंत्री मोदी ने बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान निर्माता डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती पर मंगलवार को उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन और कार्य पीढ़ियों को एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आंबेडकर का व्यक्तित्व और उनका योगदान राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन और कार्य पीढ़ियों को एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।"
खरगे ने बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी
बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर की जयंती पर, हम उस दूरदर्शी महापुरुष के प्रति गहरी श्रद्धा से नमन करते हैं, जिन्होंने भारत को उसकी नैतिक और संवैधानिक आत्मा प्रदान की। बाबासाहेब न केवल भारत के संविधान के निर्माता थे, बल्कि स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के लिए एक अथक योद्धा भी थे- ये वे मूल्य हैं जो 'भारत' के मूल विचार को परिभाषित करते हैं। आज, जब संविधान एक षड्यंत्रकारी हमले का सामना कर रहा है, तब उनके शब्द और उनकी चेतावनियाँ एक नई और गहन प्रासंगिकता के साथ गूंज रही हैं। यह एक ऐसा क्षण है जो साहस और दृढ़ विश्वास की माँग करता है। हमें केवल उन्हें याद ही नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें उठ खड़े होकर उनके द्वारा स्थापित हर सिद्धांत की रक्षा करनी चाहिए; उनके द्वारा सुनिश्चित किए गए हर अधिकार को सुरक्षित रखना चाहिए; और उन सभी मूल्यों को अक्षुण्ण रखना चाहिए जिनके लिए वे जिए और जिनके लिए उन्होंने संघर्ष किया।
