लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने जब भी बड़ा लक्ष्य उसने उसे प्राप्त किया। संकल्पों से बड़े लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है।
पीएम ने देश के विकास के लिए लोगों के सामने पांच मंत्र रखे। उन्होंने पंच मंत्रों- विकसित भारत का संकल्प, गुलामी की सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व,
एकता और एकजुटता और नागरिकों का कर्तव्य का उल्लेख किया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश की ताकत एवं कमजोरियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी धरती से जुड़ेंगे तभी तो ऊंचा उड़ेंगे और जब ऊंचा उड़ेंगे तभी तो विश्व को समाधान दे पाएंगे।
नारी सम्मान के बारे में पीएम ने कहा कि मेरे मन के अंदर का दर्द ये है कि हम नारी का अपमान करते हैं। क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाले स्वभाव से मुक्ति ले सकते हैं।
पीएम ने कहा कि हमारे पास दुनिया को देने को बहुत कुछ है। व्यक्तिगत तनाव होता है तो दुनिया को योग दिखता है, जब दुनिया को सामूहकि तनाव दिखता है तो भारत का परिवार दिखता है।