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पेपर लीक प्रदर्शन हिंसा: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का पोर्टल शुरू, पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी दर्ज करा सकेंगे शिकायत

HPEC ने शिकायत, गोपनीय जानकारी और गुमनाम सूचना देने के लिए अलग-अलग विकल्प दिए; महिलाओं से कथित दुर्व्यवहार और पुलिस की कार्रवाई में घायल लोगों के मामलों की प्राथमिकता से जांच होगी

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

जुलाई 2026 में NEET-UG को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य जगहों पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का पोर्टल सक्रिय हो गया है।अब प्रभावित लोग, प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और अन्य संबंधित व्यक्ति कमेटी के सामने अपनी शिकायतें और जानकारी दर्ज करा सकते हैं।पोर्टल का लिंक http://hpec.nic.in है। कमेटी ने शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं, जिनमें गोपनीय पहचान के साथ जानकारी देने और गुमनाम शिकायत करने का विकल्प भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश से गठित की थी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को शैलेंद्र मणि त्रिपाठी बनाम भारत संघ मामले में पारित आदेश के जरिए पांच सदस्यीय हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी का गठन किया था। अदालत ने जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, पुलिस कार्रवाई और दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत को देखते हुए यह कदम उठाया था।

कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। इसके अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

किन मामलों की प्राथमिकता से जांच करेगी कमेटी?

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और अन्य एजेंसियों की ओर से कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से लगी चोटों की जांच करने को कहा था। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा पुलिस कार्रवाई में घायल लोगों को चिकित्सा सहायता और मुआवजा देने के मुद्दे की जांच भी कमेटी के दायरे में है।

कमेटी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान लगी चोटों और उनके परिवारों पर पड़े मानसिक एवं भावनात्मक प्रभाव का भी आकलन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 के आदेश में दोनों पक्षों की ओर से हुई कथित अत्यधिक हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों को भी प्राथमिकता से देखने को कहा था।

शिकायत दर्ज कराने के लिए पोर्टल पर चार विकल्प

प्रभावित व्यक्ति के तौर पर शिकायत

प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी या अन्य प्रभावित व्यक्ति अपनी शिकायत और संबंधित जानकारी कमेटी को दे सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद कमेटी पर्याप्त समय का नोटिस देकर संबंधित व्यक्ति को पेश होने के लिए बुला सकती है।

पहचान गोपनीय रखकर शिकायत

जो व्यक्ति अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते और खुद को संवेदनशील या असुरक्षित गवाह मानते हैं, वे गोपनीयता और सुरक्षा की मांग के साथ जानकारी दे सकते हैं। ऐसे मामलों में कमेटी पहचान गोपनीय रखने और बंद कमरे में सुनवाई के लिए बुलाने की व्यवस्था करेगी।

गुमनाम जानकारी देने की व्यवस्था

कमेटी के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मामलों में कोई व्यक्ति अपनी पहचान बताए बिना भी जानकारी दे सकता है।

कमेटी को सुझाव भी दिए जा सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त और 10 सितंबर 2026 के आदेशों में शामिल मुद्दों से संबंधित अन्य जानकारी और सुझाव भी पोर्टल के जरिए दिए जा सकते हैं।

कमेटी सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कमेटी की जांच एक बार की प्रक्रिया नहीं होगी। वह समय-समय पर मामलों का आकलन करेगी और अपनी अंतरिम रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। अदालत ने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पुलिस कार्रवाई में गंभीर चोटों से जुड़े मामलों की जांच जल्द करने को कहा था। कमेटी का उद्देश्य शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर घटनाओं का आकलन करना और सुप्रीम कोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सहायता देना है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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