पीएम मोदी का विपक्ष पर निशाना
PM Modi Attacks Opposition: संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष और उसकी राजनीति को निशाने पर लिया। खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि कैसे राज्य की राजनीति को चमकाने का इस्तेमाल संसद भवन में किया जा रहा है। पीएम मोदी ने विपक्ष की लगातार हार का मुद्दा उठाते हुए आगे सकारात्मक राजनीति करने की नसीहत दी। उन्होंने बिहार में विपक्ष की हार का जिक्र करते हुए उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया। पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा, जानिए बड़ी बातें।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ पार्टियों ने संसद भवन का इस्तेमाल अपनी राज्य की राजनीति के लिए करने का एक नया ट्रेंड शुरू किया है। मैंने देखा है कि कुछ प्रदेश ऐसे हैं कि सत्ता में रहने के बाद, इतनी एंटी इंकम्बेंसी है, वो कहां जनता में जा नहीं पा रहे हैं। सारा गुस्सा सदन में आकर निकालते हैं। सदन को अपनी राज्य की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की नई परंपरा को कुछ दलों ने जन्म दिया है।
अब उन्हें उस खेल पर फिर से सोचना चाहिए जो वे पिछले 10 सालों से खेल रहे हैं, जिसे देश स्वीकार नहीं कर रहा है। उन्हें कम से कम अपने तरीके और अपनी रणनीति बदलनी चाहिए। मैं उन्हें टिप्स देने के लिए तैयार हूं कि उन्हें कैसा परफॉर्म करना चाहिए, लेकिन कम से कम सांसदों के अधिकारों को नजरअंदाज न करें। उन्हें अपनी बात कहने का मौका दें।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, बिहार चुनाव में रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और चुनाव में हार के बाद अपने अवसाद से बाहर आना चाहिए।
उम्मीद थी कि समय के साथ विपक्षी नेता बिहार में हार को स्वीकार कर लेंगे, लेकिन उनके बयानों से पता चलता है कि हार ने उन्हें बेचैन कर दिया है। शीतकालीन सत्र हार से उपजी हताशा का अखाड़ा या जीत के बाद अहंकार का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, संसद ड्रामा करने की जगह नहीं, बल्कि डिलीवर करने की जगह है। नाटक करने की कई जगहें हैं; विपक्ष ने जहां हार का सामना किया है, वहां नाटक किया है और जहां हार का सामना होगा, वहां फिर से करेगा। पिछले कुछ समय से संसद का इस्तेमाल या तो चुनावों की तैयारी के लिए या हार के बाद अपनी हताशा निकालने के लिए किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, नारे के लिए पूरा देश पड़ा है, जहां पराजित होकर आए हो वहां बोल चुके हो। जहां अभी पराजय के लिए जाने वाले हो, वहां भी बोल लीजिए। यहां नारे नहीं, नीति पर बल देना चाहिए। और वो आपकी नीयत होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, राजनीति में नकारात्मकता उपयोगी हो सकती है। लेकिन अंततः राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए। मैं आपसे अपेक्षा करता हूं कि आप नकारात्मकता को सीमित रखें और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें।
यह शीतकालीन सत्र एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। हमारे नए सभापति हमारे उच्च सदन को मार्गदर्शन देंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। जीएसटी सुधारों ने देशवासियों में श्रद्धा का वातावरण बनाया है। इस सत्र में भी इस दिशा में बहुत काम होगा।
पिछले कुछ समय से हमारे सदन का या तो चुनावी वार्मिग अप के लिए उपयोग किया जा रहा है, या तो पराजय की बौखलाहट निकालने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
सांसदों के हकों पर श्राप मत लगाइए। सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए। अपनी निराशा और पराजय में सांसदों को बलि मत बनाइए। मैं आशा करता हूं कि जिम्मेदारियों के साथ हम सब चलें। मैं देश को विश्वास देता हूं राष्ट्र प्रगति की राह पर चल पड़ा है। राष्ट्र नई ऊंचाइयों को पार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
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