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गुजरात के इस कुएं में अपने आप क्यों उठ रहीं लहरें? जानिए क्या है Well Seiche

गुजरात के मोरबी में एक कुएं के पानी में लगातार लहरें और कंपन दिखाई देने की घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कुएं का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। जानिए ‘Well Seiche’ क्या है और पानी की हलचल कब रुकेगी।

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गुजरात में कुएं के पानी में लहरों की वजह क्या है?
Authored by: Digpal Singh
Updated Aug 7, 2026, 15:28 IST
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गुजरात के मोरबी जिले के वीरपर्दा गांव में एक कुएं के पानी का लगातार हिलना और उसमें लहरें उठना इन दिनों गुजरात और देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कुएं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में कुएं के पानी की सतह किसी टब के पानी की तरह लगातार एक तरफ से दूसरी तरफ, ऊपर-नीचे होती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह गतिविधि कई दिनों से देखी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुआं लगभग 18 फीट गहरा है। मामले की जांच के लिए अधिकारियों ने भूजल विशेषज्ञों से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

जिला कलेक्टर स्वपनिल खरे का कहना है कि सोशल मीडिया पर आ रही रिपोर्टों के बाद जिले के जियोलॉजिस्ट ने यहां का दौरा किया। उन्होंने बताया, जियोलॉजिस्ट का मानना है कि संभवत: कुएं की गहराई में हवा ट्रैप हो गई है, जिसके चलते पानी में यह हलचल दिख रही है। उन्होंने कहा कि कुएं में फंसी हवा इधर-उधर हिलती है तो कुएं का पानी में भी उतनी ही तेजी से लहरें आती हैं। गुजरात ग्राउंड वाटर रिसर्च इंस्टीट्यूट को भी इस पर डिटेल स्टडी करके रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

जिस तरह की घटना सामने आई है, उसे Well Seiche (वेल सैयस) कहा जाता है और घटना को समझने के लिए भूजल, दबाव और पानी की प्राकृतिक तरंगों को समझना बहुत जरूरी है। चलिए समझते हैं ऐसा क्यों हो रहा है -

क्या है ‘Well Seiche’?

मोरबी के वीरपर्दा गांव में जो घटना देखने को मिल रही है वह जिस ओर इशारा कर रही है, उसे ‘Seiche’ कहा जाता है। सामान्य भाषा में इसे किसी सीमित जलाशय या कुएं में बनने वाली खड़ी या आगे-पीछे हिलने वाली लहर समझ सकते हैं। जब पानी को किसी बाहरी या अंदरूनी दबाव से हल्का-सा धक्का मिलता है, तो उसके बाद पानी आगे-पीछे झूलने लगता है। ऐसी स्थिति में बनने वाली लहरें कुछ समय तक बनी रह सकती हैं। यह घटना झीलों और जलाशयों में भी देखी जाती है।

क्यों होती है ‘Well Seiche’ की घटना

oceanservice.noaa.gov के अनुसार Seiche आमतौर पर तेज हवाओं और वायुमंडलीय दबाव में होने वाले तेज बदलाव के कारण होता है। इसके चलते पानी जलाशय के एक सिरे से दूसरे की ओर तेजी से बहता है। जब हवा रुकती है तो पानी दूसरे सिरे से पहले सिरे की ओर वापस आता है और फिर पानी घंटों तक या कई दिनों तक ऐसे ही आगे-पीछे हिलता रहता है। इसी तरह, भूकंप, सुनामी या जबरदस्त तूफान भी समुद्र के किनारों और बंदरगाहों पर 'सैयस' पैदा कर सकते हैं।

बारिश के बाद भूजल दबाव बन सकता है बड़ा कारण

मोरबी में यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब गुजरात के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। तेज बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी जमीन के अंदर पहुंचता है। इससे स्थानीय भूजल स्तर और भूमिगत जलदाब में अचानक बदलाव हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि तेज बारिश के दौरान जमीन के भीतर फंसी हवा का दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे ‘Lisse effect’ के रूप में समझाया है। इसमें बारिश से जमीन की सतह के नीचे हवा का दबाव बढ़ने पर कुएं में पानी का स्तर अचानक ऊपर आ सकता है।

हालांकि, Lisse effect और Morbi की घटना को एक ही घटना मानना अभी जल्दबाजी होगी। स्थानीय भूगर्भीय संरचना की जांच जरूरी है। मोरबी के मामले में अधिकारियों की भूजल जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। इस मामले की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।

सिर्फ बारिश ही नहीं, ये कारण भी हो सकते हैं

कुएं में इस तरह की असामान्य हलचल के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। जिनमें से पहला तो भूजल दबाव में बदलाव है। अगर कुआं किसी ऐसे भूमिगत जलभृत (aquifer) से जुड़ा है, जिसमें दबाव तेजी से बदल रहा हो, तो पानी ऊपर-नीचे हो सकता है।

दूसरा कारण भूमिगत जल का अचानक प्रवाह है। आसपास से पानी किसी दरार, छिद्र या जलधारा के रास्ते कुएं तक पहुंच रहा हो तो वह भी पानी में हलचल पैदा कर सकता है। तीसरा कारण भूकंपीय कंपन है। भूकंप या दूरस्थ भूकंपीय गतिविधि भी कुओं के पानी को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस मामले में किसी भूकंप की पुष्टि नहीं हुई है। चौथा कारण हवा और स्थानीय कंपन है। तेज हवा, पास से गुजरते भारी वाहन, पंपिंग या अन्य कंपन भी पानी की सतह को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन कई दिनों तक लगातार कुएं के पानी में इस तरह की हलचल इन वजहों से नहीं हो सकती।

कुएं में यह हलचल कब रुकेगी?

अगर कुएं में हो रही हलचल की वजह भूजल दबाव है, तो यह हमेशा नहीं चलता रहेगा। यहां पानी किसी झूले की तरह काम करता है। शुरुआत में उसे ऊर्जा मिलती है तो वह ज्यादा हिलता है, लेकिन पानी और आसपास की जमीन के बीच घर्षण तथा पानी की आंतरिक ऊर्जा-हानि के कारण धीरे-धीरे यह ऊर्जा खत्म होती जाती है। इस तरह कुएं में हो रही हलचल भी खत्म हो जाएगी।

जब भूजल का दबाव सामान्य स्तर पर लौटेगा, पानी का प्रवाह संतुलित होगा और उतार-चढ़ाव (Oscillation) की ऊर्जा खत्म होगी, तब लहरों की ऊंचाई कम होती जाएगी और आखिरकार पानी शांत हो जाएगा। मोरबी के मामले में अभी सबसे अहम सवाल यही है कि पानी को शुरुआती ऊर्जा या दबाव किस स्रोत से मिली। भूजल स्तर, कुएं की गहराई, आसपास के जलभृत, मिट्टी की संरचना, बारिश का डेटा और भूकंपीय रिकॉर्ड की जांच से इसका ज्यादा सटीक जवाब मिल सकता है।

इसलिए फिलहाल इसे किसी रहस्यमयी या अलौकिक घटना के बजाय एक संभावित भूजल-भौतिक घटना के रूप में देखना ज्यादा वैज्ञानिक होगा। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि मोरबी के इस कुएं में लगातार लहरों की वास्तविक वजह क्या थी।

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