Devendra Fadnavis: कांग्रेस विधायक असलम शेख ने सांगली जिले के इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ध्यान पानी, सड़क और सार्वजनिक स्थानों जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर होना चाहिए। एएनआई से बात करते हुए शेख ने सवाल किया कि सरकार कब तक इस तरह के कदमों से लोगों को बेवकूफ बनाती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर कर दीजिए , सब कुछ कीजिए, लेकिन इसके अलावा शहर के कल्याण के लिए भी काम कीजिए। वहां न तो पीने के पानी की उचित सुविधा है, न ही सड़कें। वहां कोई बगीचा और खेल के मैदान नहीं हैं। लोग बदतर हालात में रह रहे हैं। तो आप कब तक लोगों को इस तरह बेवकूफ बनाओगे?
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह सरकार केवल जातिवाद और संघर्ष पैदा करने में रुचि रखती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एससीपी) के नेता जयंत पाटिल ने भी दावा किया कि इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर करने की मांग के पीछे बहुत कम लोग थे। पाटिल ने कहा कि कुछ वर्षों से बहुत कम लोग इस बदलाव की मांग कर रहे थे। इसका मतलब यह नहीं कि स्थानीय लोग भी यही चाहते थे।
इस्लामपुर का नाम हुआ ईश्वरपुर
इस बीच, महायुति सरकार के नेताओं ने इस फैसले का बचाव किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नाम परिवर्तन लंबे समय से चली आ रही जनता की मांग का नतीजा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि जयंत पाटिल ने चिंता जताई है, जिसे मैं समझता हूं। लेकिन इस जगह का मूल और ऐतिहासिक नाम ईश्वरपुर था। यह लोगों की लंबे समय से मांग थी और सत्ता में आने के बाद हमने इस पर कार्रवाई की है। इस निर्णय का समर्थन करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा कि इस्लामपुर नामक स्थान भारत को हिंदू राष्ट्र बताने के उनके विचार से मेल नहीं खाता। उन्होंने एएनआई से कहा कि आज सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है। यह उस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग थी... हमारे देश में किसी जगह का नाम इस्लामपुर नहीं हो सकता, जहां बहुसंख्यक लोग हिंदू हैं। क्या यह पाकिस्तान है? यह एक 'हिंदू राष्ट्र' है, इसलिए जगहों के नाम हिंदू विचारधारा के होने चाहिए। महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि सांगली ज़िले के इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर कर दिया जाएगा। यह घोषणा राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन की गई।
