Caste Census: कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने रविवार को मोदी सरकार (Modi Govt) पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार के रुख में समय-समय पर आए बदलावों को भी उजागर किया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''20 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा था कि भारत सरकार ने नीति के रूप में यह निर्णय लिया है कि जनगणना में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं की जाएगी।''
मोदी सरकार पर बरसे जयराम रमेश
जयराम रमेश ने कहा कि 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर यह कहा था कि उसने जाति जनगणना न कराने का एक सोच-समझकर लिया गया नीतिगत निर्णय किया है। 28 अप्रैल 2024 को एक टेलीविजन इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग उठाने पर कांग्रेस पर 'अर्बन नक्सल मानसिकता' का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को, जब देश कुछ दिन पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले के सदमे से उबर भी नहीं पाया था, तभी मोदी सरकार ने अचानक घोषणा कर दी कि आगामी जनगणना के हिस्से के रूप में जाति जनगणना कराई जाएगी।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
इस दौरान, जयराम रमेश ने 30 मार्च 2026 एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी जिक्र किया, जिसमें में रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त ने कहा था कि चल रही जनगणना 2027 के अधिकांश परिणाम 2027 में ही उपलब्ध हो जाएंगे, क्योंकि पूरी जनगणना डिजिटल तरीके से की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि अब मोदी सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है, यह कहते हुए कि जाति जनगणना के परिणाम कुछ वर्षों तक उपलब्ध नहीं होंगे-जबकि यह तथ्य नजरअंदाज किया जा रहा है कि बिहार और तेलंगाना दोनों ने व्यापक जातिगत सर्वेक्षण छह महीने से भी कम समय में पूरा कर लिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह देश को गुमराह कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाने में लगे हैं। अब वे उस प्रावधान में संशोधन करना चाहते हैं, जिसे संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था। सीधा सीधा छिपा हुआ एजेंडा यही है कि जाति जनगणना कराना ही नहीं है।
