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Justice Varma cash case: जहां से बरामद हुए थे अधजले नोट, वहां था जस्टिस वर्मा का 'गुप्त नियंत्रण'; जांच समिति ने की महाभियोग की सिफारिश

Justice Varma cash case: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव आ सकता है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की है।

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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

Justice Varma cash case: दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच समिति ने महाभियोग चलाने की सिफारिश सरकार से कर दी है। जस्टिस वर्मा के घर से कैश मिलने के मामले में जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई खुलासे किए हैं। कदाचार की भी बात भी सामने आई है। न्यायमूर्ति वर्मा उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश थे और उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया था।

कदाचार में लिप्त थे जस्टिस वर्मा?

न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से जले नोटों की कथित बरामदगी की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर रूम पर ‘‘गुप्त या सक्रिय नियंत्रण’’ था, जहां से बड़ी मात्रा में अधजली नकदी मिली थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे न्यायमूर्ति वर्मा के कदाचार का पता चलता है, जो इतना गंभीर है कि उन्हें (न्यायाधीश को) हटाया जाना चाहिए।

55 गवाहों से पूछताछ

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय समिति ने 10 दिनों तक मामले की पड़ताल की, 55 गवाहों से पूछताछ की और न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर 14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे लगी आग के परिप्रेक्ष्य में घटनास्थल का दौरा भी किया। जांच समिति ने 64-पृष्ठ की अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘‘इस प्रकार समिति का मानना है कि नकदी राशि राष्ट्रीय राजधानी के 30 तुगलक क्रीसेंट स्थिति आवास के भंडार कक्ष में पाया गया था, जो आधिकारिक तौर पर न्यायमूर्ति वर्मा के कब्जे में था। इतना ही नहीं, भंडार कक्ष पर न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का गुप्त या सक्रिय नियंत्रण था।’’

महाभियोग की सिफारिश

रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की है। तीन-सदस्यीय समिति में न्यायमूर्ति नागू के अलावा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन भी शामिल थे। न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की सिफारिश करते हुए समिति ने कहा है, ‘‘इस संबंध में कोई भी कमी जनता के विश्वास को खत्म कर सकती है, जिसे सख्ती से देखा जाना चाहिए।’’

रिपोर्ट में और क्या-क्या

रिपोर्ट के अनुसार सशक्त अनुमानात्मक साक्ष्य के माध्यम से यह स्थापित होता है कि जले हुए नोट 15 मार्च 2025 को तड़के 30 तुगलक क्रीसेंट स्थित आवास के भंडार कक्ष से निकाले गये थे।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद प्रत्यक्ष और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए, यह समिति दृढ़ता से इस बात पर सहमत है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश के 22 मार्च के पत्र में वर्णित आरोपों में पर्याप्त तथ्य हैं और कदाचार साबित पाया गया है। यह कदाचार इतना गंभीर है कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है...।’’

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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