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'मेरी मूर्खता से मुख्यमंत्री बना, इसको कोई सेंस नहीं...' विधानसभा में जीतन राम मांझी पर भड़के नीतीश कुमार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 9, 2023, 05:52 PM IST

Nitish Kumar: नीतीश कुमार ने कहा कि इस आदमी को कोई आइडिया नहीं है। हमने इसको मुख्यमंत्री बना दिया। दो महीने के बाद हमारी ही पार्टी के लोग कहने लग गए कि इसको हटाइए। ये गड़बड़ आदमी है। ये मेरी मूर्खता से सीएम बना था। इस आदमी को कोई सेंस नहीं है।

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नीतीश कुमार

Photo : BCCL

Nitish Kumar: बिहार विधानसभा में गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मामला यहां तक पहुंच गया कि नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाने के अपने निर्णय को मूर्खतापूर्ण बता दिया।

दरअसल, विधानसभा में जातिगत सर्वेक्षण और आरक्षण का दायरा बढ़ाने पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान जीतन राम मांझी ने जातिगत जनगणना पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, हम नहीं मानते कि बिहार की जातिगत जनगणना सही हुई है। अगर आंकड़े गलत हैं तो सही लोगों तक सरकार द्वारा दिया जाने वाला लाभ नहीं पहुंचेगा। इतना कहते ही नीतीश कुमार भड़क गए और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

नीतीश कुमार ने क्या कहा?

जीतन राम मांझी को लेकर नीतीश कुमार ने कहा कि इस आदमी को कोई आइडिया नहीं है। हमने इसको मुख्यमंत्री बना दिया। दो महीने के बाद हमारी ही पार्टी के लोग कहने लग गए कि इसको हटाइए। ये गड़बड़ आदमी है। फिर हम मुख्यमंत्री बन गए। नीतीश कुमार ने कहा, यह कहता रहता है कि ये मुख्यमंत्री था। ये क्या मुख्यमंत्री था? ये मेरी मूर्खता से सीएम बना था। इस आदमी को कोई सेंस नहीं है।

मांझी ने किया पलटवार

विधानसभा में तीखी बहस के बाद जीतन राम मांझी बाहर निकले और मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार पर बड़ा हमला किया। मांझी ने कहा, नीतीश कुमार ने कोई क्वालिटी देखकर मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनाया था। उन्होंने कहा, वो संकट में थे तो मुसहर-भुंइया है, सीधा है, ये सोचकर मुख्यमंत्री बना दिया। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार ने सोचा कि जो कहेंगे, करता रहेगा। लेकिन जब मैं काम करने लगा तो इन्हें अपनी कुर्सी पर खतरा नजर आने लगा। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार तुम ताम करने लगे, अनाप-शनाप बोलने लगे। उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है। मैं उम्र में उनसे बड़ा हूं, राजनीति में भी उनसे पहले आया था फिर वे कैसे मुझे तुम-ताम बोल सकते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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