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J&K Heavy Rainfall: धरती के स्वर्ग में 'आफत की बरसात', नदियां-नाले गुस्से से लाल, पुल धंसे फटे पहाड़; 11 लोगों की गई जान

J&K Heavy Rainfall: धरती के स्वर्ग कहे जाने वाला कश्मीर मंगलवार को आसमानी हादसों की चपटे में रहा है। बादल फटने, बाढ़ आने, पुल धंसने और लैंडस्लाइड की तमाम घटनाओं ने झकझोर दिया। माता वैष्णो देवी मार्ग पर लैंडस्लाइड की चपेट में 7 लोगों की मौत के साथ राज्य में वर्षा जनित घटनाओं में कुल 11 लोगों के मौत की खबर है। आइये जानते हैं जम्मू-कश्मीर में कल मौसम कैसा रहेगा?

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जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से तबाही

J&K Heavy Rainfall: जम्मू क्षेत्र में मंगलवार को नदियों के उफान पर होने से पानी के वेग से रास्ते में आने वाली हर चीज तहस-नहस हो गई और चट्टान, पेड़ और पत्थर ढलानों से नीचे गिर पड़े। जम्मू क्षेत्र में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई जिनमें सात तीर्थयात्री भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन की चपेट में आने से हुई। लगातार भारी बारिश ने न केवल जम्मू में तबाही मचाई, जहां अचानक बाढ़ और भूस्खलन के मद्देनजर वैष्णो देवी मंदिर की तीर्थयात्रा स्थगित कर दी गई, बल्कि कश्मीर घाटी में भी। बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, पुल ढह गए और मोबाइल टावर और बिजली के खंभे टहनियों की तरह टूट गए।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश के बड़े हिस्से में दूरसंचार सेवाएं ठप हो गईं, जिससे लाखों लोगों का संचार संपर्क टूट गया और समस्याएं बढ़ गईं। उन्होंने बताया कि जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात निलंबित कर दिया गया और दर्जनों पहाड़ी सड़कें भूस्खलन या अचानक आई बाढ़ के कारण अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हो गईं। जम्मू आने-जाने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं। रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर मंगलवार अपराह्न करीब तीन बजे भूस्खलन हुआ जिसकी चपेट में आने से कम से सात लोगों की मौत हो गई जबकि 21 अन्य घायल हुए हैं। मृतक संख्या बढ़ सकती है।

वैष्णों देवी मार्ग पर लैंडस्लाइड से 7 की मौत

अधिकारियों ने बताया कि अर्धकुआरी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल जुटे हुए हैं और कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि भूस्खलन कटरा शहर से पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक 12 किलोमीटर के घुमावदार रास्ते के लगभग आधे रास्ते में हुआ। मंदिर तक जाने के दो रास्ते हैं। हिमकोटि मार्ग पर सुबह से ही यात्रा स्थगित कर दी गई थी, लेकिन पुराने रास्ते पर अपराह्न 1.30 बजे तक यात्रा जारी रही, जब अधिकारियों ने बारिश के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाते हुए इसे स्थगित करने का फैसला किया।

कहां के रहने वाले थे हादसे की चपेट में आए लोग?

पंजाब के मोहाली की किरण भी उन लोगों में शामिल थीं जो पत्थरों, पेड़ों और चट्टानें गिरने की चपेट में आ गईं। किरण ने कटरा के एक अस्पताल में ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि मैं दर्शन करने के बाद पहाड़ी से नीचे आ रही थी, तभी लोग चिल्लाने लगे। मैंने पत्थर गिरते देखे। मैं सुरक्षित जगह पर पहुंची, लेकिन घायल हो गई। घटना में बाल-बाल बची एक लड़की ने कहा, कि हमारा पांच लोगों का एक समूह था, जिनमें से तीन घायल हैं। लड़की घटना के बाद से सदमे में है।

कई रिश्तेदार अपने प्रियजनों की सूचना प्राप्त करने के लिए कटरा स्थित अस्पताल और वैष्णो देवी आधार शिविर में जमा हुए। कुछ घायलों को जम्मू से लगभग 15 किलोमीटर दूर कटरा के नारायण अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

जम्मू के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि कटरा और उसके आसपास बचाव और राहत कार्यों में सेना के तीन कॉलम तुरंत तैनात कर दिये गए।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘एक कॉलम कटरा के अर्धकुंवारी में लोगों की जान बचाने में मदद कर रहा है। एक कॉलम कटरा से ठाकरा कोट जाने वाली सड़क पर भूस्खलन वाले स्थान पर पहुंच गया है और एक कॉलम जौरियां के दक्षिण में सहायता प्रदान कर रहा है। लोगों की जान बचाने, ज़रूरतमंदों को सहायता प्रदान करने और नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुँचाने के प्रयास जारी हैं। नागरिक एजेंसियों के साथ गहन समन्वय किया जा रहा है।

किश्तवाड़ में बादल फटे थे।

बारिश की तबाही का यह दिन किश्तवाड़ जिले के चिसोती में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ के कुछ दिनों बाद आया है, जो मचैल माता मंदिर के रास्ते में आने वाला आखिरी गांव है। चिसोती में 14 अगस्त को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ में 65 लोग मारे गए थे, जिनमें ज़्यादातर तीर्थयात्री थे जबकि 100 से ज़्यादा घायल हुए थे। कई लोग अभी भी लापता हैं।

मंगलवार को जम्मू प्रांत में बारिश से संबंधित अन्य घटनाओं में, डोडा जिले में कम से कम चार लोगों के मारे जाने की सूचना है। इनमें से तीन लोग फिसलकर नदी में गिर गए और तेज बहाव वाले पानी में डूब गए, जबकि एक की घर ढहने से मौत हो गई। क्षेत्र के निचले इलाकों से सैकड़ों लोगों को निकाला गया। अधिकारियों ने बताया कि किश्तवाड़, रियासी, राजौरी, रामबन और पुंछ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों से सार्वजनिक और निजी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की सूचना हैं। उन्होंने बताया कि आपदा की असली तस्वीर जमीनी हालात के आकलन के बाद ही सामने आएगी।

सीएम ने लिया संज्ञान

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने एक आपात बैठक की अध्यक्षता की और जिला प्रशासकों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया। अब्दुल्ला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि आपातकालीन बहाली कार्यों और अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उपायुक्तों (डिप्टी कमिश्नर) को अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब्दुल्ला ने प्रशासन को प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन, पानी और दवा जैसी ज़रूरी चीज़ें उपलब्ध कराने और कमजोर समूहों को राहत मुहैया कराने को प्राथमिकता देने का भी आदेश दिया।

मोधोपुर बैराज फुल

बाढ़ के कारण क्षेत्र के लगभग सभी जलाशय खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, जिससे निचले इलाके और प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कठुआ में रावी नदी पर बने मोधोपुर बैराज का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के स्तर को पार कर गया, जिससे कठुआ ज़िले में भारी बाढ़ आ गई। तराना, उझ, तवी और चिनाब जैसी प्रमुख नदियां भी अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे पुलिस और नागरिक अधिकारियों को लोगों से सुरक्षित क्षेत्रों में जाने की बार-बार सार्वजनिक अपील करनी पड़ रही है।

मौसम विभाग के अनुसार, सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटे के दौरान कठुआ ज़िले में 155.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, इसके बाद डोडा के भद्रवाह में 99.8 मिलीमीटर, जम्मू में 81.5 मिलीमीटर और कटरा में 68.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रशासन ने लोगों को जल निकायों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने के लिए सलाह जारी की है।

कल कैसा रहेगा जम्मू-कश्मीर का मौसम

मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक लगातार मध्यम से भारी बारिश और बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की संभावना का अनुमान जताया है। अधिकारियों ने नागरिकों को जलाशयों और भूस्खलन के जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह जारी की है। शहरी इलाकों से पानी निकालने के लिए अधिकारियों द्वारा अथक प्रयास के बीच, मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी उपकरण की कमी की स्थिति में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं से तुरंत सहायता ली जानी चाहिए।

विभिन्न स्थानों पर ऑप्टिकल फाइबर को व्यापक नुकसान पहुंचने के बाद जम्मू कश्मीर में सभी सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क बाधित होने की सूचना है। संचार व्यवस्था ठप होने से आपातकालीन प्रतिक्रिया उपायों में बाधा उत्पन्न हुई और निवासियों में दहशत उत्पन्न हुई। दूरसंचार ऑपरेटरों ने कहा कि सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए तकनीकी टीमों को तैनात किया गया है। जम्मू संभाग के सभी सरकारी और निजी स्कूल को 27 अगस्त तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है। जम्मू कश्मीर विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने बुधवार को होने वाली कक्षा 10वीं और 11वीं की सभी परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया। इसके अलावा, जम्मू में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सहित विभिन्न सुरक्षा संगठनों में कांस्टेबल के लिए भर्ती अभियान भी दिन भर के लिए रोक दिया गया।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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