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जल प्रलय: ISRO का खुलासा-हिमालय में बढ़ता जा रहा ग्लेशियल लेक्स का आकार, मंडरा रहा केदारनाथ हादसे जैसा एक और खतरा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 23, 2024, 07:33 AM IST

Isro Report on Glaciers Melting: हिमालयी क्षेत्रों (Himalayan regions) में बनी ग्लेशियल लेक्स (Glacial Lakes) पर इसरो (ISRO) नजर रखता है। सैटेलाइट्स के जरिए इसरो इनका अध्ययन करता है, जिससे किसी भी खतरे से पहले बचाव का रास्ता निकाला जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लेशियल लेक्स का तेजी से विस्तार हो रहा है, जो मानव सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है।

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ग्लेशियल लेक्स पर इसरो की रिपोर्ट

Photo : iStock

Isro Report on Glaciers Melting: बर्फीले पहाड़ों से ढ़का हिमालय खतरे की घंटी बजा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण यहां बर्फ तेजी से पिघल रही है और ग्लेशियल लेक्स (Glacial Lakes) का आकार बढ़ता जा रहा है। अगर, ऐसे ही चलता रहा तो देश में कभी भी जल प्रलय आ सकती है। इसका खुलासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की नई रिपोर्ट में किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारतीय हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर खतरनाक दर से पिघल रहे हैं, जिससे हिमनदीय झीलों (Glacial Lakes) का विस्तार हो रहा है।

इसरो की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ग्लेशियल लेक्स का विस्तार इसी तरह होता रहा तो ये कभी भी फट सकते हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है और इसके विनाशकारी परिणाम भी हो सकते हैं। जैसे केदारनाथ, चमोली और सिक्किम जैसे हादसे हुए। यानी, भारत पर एक और हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

इसरो करता है ग्लेशियल लेक्स की स्टडी

हिमालयी क्षेत्रों में बनी ग्लेशियर लेक्स पर इसरो नजर रखता है। सैटेलाइट्स के जरिए इसरो इनका अध्ययन करता है, जिससे किसी भी खतरे से पहले बचाव का रास्ता निकाला जा सके। इन ग्लेशियल लेक्स का इसरो को पास 1984 से 2023 तक डेटा है। इस डेटा के अध्ययन से पता चला है कि हिमालय क्षेत्र में चिह्नित ग्लेशियल लेक्स में से 27 प्रतिशत से अधिक का 1984 के बाद से उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और इनमें से 130 भारत में हैं।

हिमालय पर कुल 2431 झीलें, सबका बढ़ रहा आकार

इसरो ने 1984 से 2023 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया है। इसके बाद अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सैटेलाइट्स इमेज ग्लेशियल लेक्स में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती हैं। 2016-17 के दौरान चिह्नित की गईं 10 हेक्टेयर से बड़ी 2,431 झीलों में से 676 हिमनद झीलों का 1984 के बाद से उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वहीं, 676 झीलों में से 601 का विस्तार दोगुने से अधिक हो गया है, जबकि 10 झीलों का विस्तार डेढ़ से दोगुना और 65 झीलों का विस्तार 1.5 गुना हो गया है।

भारत में ही 130 झीलें

बता दें, ये ग्लेशियल लेक्स या फिर हिमनद झीलें भारत में नदियों का मुख्य स्त्रोत हैं। हालांकि, इनका आकार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियल लेक्स आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFS) का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसरो ने कहा है कि 676 झीलों में से 130 भारत के भीतर हैं, जिनमें से सिंध नदी के ऊपर 65, गंगा नदी के ऊपर सात और ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर 58 ग्लेशियल लेक्स बनी हुई हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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