एक अहम घटनाक्रम में अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले ईरानी कच्चे तेल के टैंकर पिंग शुन (IMO 9231901) ने यात्रा के बीच में ही अपनी दिशा बदल ली है और अब भारत के बजाय चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज ईरान के खार्ग आइलैंड से करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था और शुरुआत में गुजरात के वडिनार पोर्ट को अपना गंतव्य दिखा रहा था। अगर यह खेप भारत पहुंचती, तो यह करीब सात वर्षों बाद देश में आने वाली ईरानी तेल की पहली आपूर्ति होती। जहाज के आधी रात तक वडिनार पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन बीच रास्ते में उसके रुख बदलने से स्थिति अचानक बदल गई। यह एक क्रूड ऑयल टैंकर है, जिसकी लंबाई लगभग 250 मीटर और चौड़ाई करीब 44 मीटर है।
भारत से चीन की ओर मुड़ा
हालांकि, ताजा AIS ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जहाज ने भारत के पश्चिमी तट के पास अचानक दिशा हदल दी और अब करीब 9 नॉट्स की रफ्तार से चीन की ओर बढ़ रहा है। इसका नया अनुमानित आगमन समय 29 अप्रैल 2026 बताया जा रहा है। इस अचानक बदलाव ने ईरानी तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता को फिर उजागर कर दिया है, जो प्रतिबंधों, भू-राजनीतिक तनाव और बदलते व्यापारिक समीकरणों से प्रभावित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल करीब 9.5 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में जहाजों पर स्टोर है।
ईरान भी खर्ग द्वीप वाले इस रास्ते को खुला रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा
खर्ग द्वीप से होने वाली ये खेप ही शायद एकमात्र ऐसा जरिया हैं, जिससे भारत अपनी आयात व्यवस्था को बहुत ज़्यादा ऊंची कीमतों पर पहुंचने से बचा सकता है; और ईरान भी खर्ग द्वीप वाले इस रास्ते को खुला रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
मई 2019 के बाद से यह ईरान से भारत की पहली सीधी खेप
अगर यह टैंकर भारत आता है तो मई 2019 के बाद से यह ईरान से भारत की पहली सीधी खेप होगी; उस समय नई दिल्ली ने कड़े प्रतिबंधों का पालन करते हुए आयात रोक दिया था।
'6 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं'
वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत के लिए भारत समेत कई देशों को आमंत्रित किया है। उन्होंने आगे कहा, हम ईरान और अन्य देशों के साथ संपर्क में हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे जहाजों, जिनमें एलपीजी, एलएनजी और अन्य उत्पाद हैं, उनके लिए निर्बाध और सुरक्षित पारगमन हो सके। पिछले कई दिनों से चल रही बातचीत के परिणामस्वरूप, 6 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं, और हम संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं।