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मार्च में लाइसेंस हो गया था समाप्त, BAMS डॉक्टर कर रहे थे इलाज...Delhi के बेबी केयर सेंटर के अग्निकांड में अब तक क्या-क्या हुए खुलासे?

D​elhi Baby Care Center fire: दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बॉर्न चाइल्ड हॉस्पिटल को जारी किया गया लाइसेंस 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका था। वहीं, अस्पताल में जो डॉक्टर नवजातों का इलाज कर रहे थे, वे भी योग्य नहीं थे। उनके पास केवल बीएएमएस डिग्री थी।

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ईस्ट दिल्ली के विवेक विहार में बेबी केयर सेंटर में लगी आग

Photo : ANI

Delhi Baby Care Center fire: दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर सेंटर में लगी आम में सात नवजातों की मौत की घटना ने सभी के रौंगटे खड़े कर दिए हैं। इस अग्निकांड में पुलिस ने अस्पताल के मालिक और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से घटना की मजिस्ट्रेरियल जांच के आदेश जारी किए गए हैं। पुलिस की अबतक की जांच में सामने आया है कि बेबी केयर न्यू बॉर्न चाइल्ड हॉस्पिटल को जारी किया गया लाइसेंस 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका था। वहीं, अस्पताल में जो डॉक्टर नवजातों का इलाज कर रहे थे, वे भी योग्य नहीं थे। उनके पास केवल बीएएमएस डिग्री थी।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि अस्पताल के मालिक की पहचान पश्चिम विहार के भैरों एन्क्लेव निवासी नवीन खिची के रूप में हुई है। वहीं, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की पहचान हरियाणा के जिला चरखी दादरी निवासी डॉ. आकाश (26) के रूप में हुई, जो बीएएमएस डिग्री धारक है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा कि अस्पताल में अग्निकांड में सात बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि पांच नवजात शिशुओं का इलाज चल रहा है।

ऑक्सीजन के सिलेंडर फटे मिले, बिना फायर सिस्टम चल रहा था अस्पताल

पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि घटना के बाद अस्पताल का निरीक्षण किया गया तो वहां फटे हुए ऑक्सीजन सिलेंडर मिले। इस मामले में आईपीसी की धारा 336, 304 ए और 34 के तहत अपराध के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके अलावा, पुलिस स्टाफ, फायर ब्रिगेड स्टाफ और क्राइम टीम द्वारा अस्पताल का गहन निरीक्षण किया गया। अस्पताल के निरीक्षण और नर्सिंग स्टाफ की जांच करने पर यह पाया गया कि अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद नहीं था। अनुचित प्रवेश-निकास, आपातकालीन निकास की अनुपस्थिति भी थी।

क्षमता से ज्यादा बच्चे थे भर्ती

पुलिस ने बताया कि समाप्त हो चुके लाइसेंस के अनुसार अस्पताल को केवल पांच बिस्तरों की अनुमति थी, लेकिन घटना के समय अस्पताल में 12 नवजात भर्ती थे। जांच के दौरान पता चला कि 'बेबी केयर न्यू बॉर्न चाइल्ड हॉस्पिटल' की विवेक विहार, पंजाबी बाग समेत हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम में चार शाखाएं हैं। इस अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन खिची पीडियाट्रिक मेडिसिन में एमडी है। वह और उनकी पत्नी डॉ. जागृति (दंत चिकित्सक) उक्त अस्पताल चला रहे हैं। आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। विद्युत निरीक्षक (श्रम विभाग) से विद्युत निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है। दिल्ली अग्निशमन सेवा से भी रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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