India Gate Old Name: दिल्ली की सबसे मशहूर इमारतों में से एक, इंडिया गेट, हर किसी की नजरों को अपनी ओर खींचती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज इसे जो नाम हम जानते हैं, उससे पहले इसका एक और नाम था? जानकर आपको भी यकीन नहीं होगा! यह स्मारक सिर्फ युद्ध की याद नहीं, बल्कि इतिहास और ब्रिटिश राज का प्रतीक भी है।
ब्रिटिश राज के समय इस स्मारक को “All India War Memorial” कहा जाता था। यह स्मारक भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाने के लिए बनाया गया था। इसकी विशाल संरचना और भव्यता इसे उस समय के ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति का प्रतीक भी बनाती थी।
इंडिया गेट को ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियन ने डिजाइन किया। इसकी ऊँचाई लगभग 42 मीटर है और इसके भव्य स्थापत्य में क्लासिकल यूरोपियन शैली की झलक दिखाई देती है। लुटियन ने इसे ऐसा बनाया कि यह दिल्ली के केंद्र में एक प्रमुख आकर्षण बन सके।
इस स्मारक पर प्रथम विश्व युद्ध और अफ़गान युद्ध में शहीद हुए लगभग 70,000 भारतीय सैनिकों के नाम खुदे हुए हैं। यह शिलालेख दर्शाता है कि इंडिया गेट केवल वास्तुकला का नमूना नहीं, बल्कि एक जीवित स्मृति स्थल भी है।
इंडिया गेट को शुरू में “Coronation Gate” के नाम से भी जाना जाता था। यह नाम ब्रिटिश राज के दौरान शाही कार्यक्रमों और परेडों के संदर्भ में इस्तेमाल होता था।
साल 1931 में इंडिया गेट को जनता के लिए खोला गया। तब से यह स्मारक आम लोगों के लिए खुला है और स्वतंत्रता से पहले ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति का प्रतीक माना जाता था।
स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदलकर इंडिया गेट रख दिया गया। अब यह स्मारक भारतीय सैनिकों की वीरता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया है।
आज इंडिया गेट पर गणतंत्र दिवस परेड और अन्य राष्ट्रीय अवसरों पर श्रद्धांजलि दी जाती है। यह स्मारक अब केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि भारत की वीरता, गौरव और इतिहास का अमिट प्रतीक बन चुका है।