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कैसे विजय के 'संकटमोचक' बने खरगे? कांग्रेस के एक दांव ने बदला तमिलनाडु का सियासी खेल; पढ़ें इनसाइड स्टोरी

Tamil Nadu Govt Formation: थलपति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को मिले वामदलों और अन्य के समर्थन के बाद पार्टी ने सफलतापूर्वक बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अहम भूमिका निभाई।

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Photo : Times Now Digital
तमिलनाडु में कांग्रेस का हाथ, विजय के साथ
Edited by: Anurag Gupta
Updated May 8, 2026, 22:53 IST
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Tamil Nadu Govt Formation: तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके युग समाप्त हो गया और अब थलपति विजय के नेतृत्व वाली सरकार बनने जा रही है। अभिनेता से नेता बने विजय 4 मई को सामने आए चुनावी नतीजों के बाद लगातार राजभवन जा रहे थे, लेकिन पर्याप्त संख्याबल नहीं होने की वजह से उन्हें सरकार बनाने के लिए राज्यपाल ने आमंत्रित नहीं किया।

थलपति विजय ने फरवरी 2024 में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) का गठन किया। इसके बाद से ही टीवीके की नजर विधानसभा चुनावों पर थी और सामने आए नतीजों में विजय की मेहनत दिखाई भी दी। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में पहली बार चुनाव लड़ी टीवीके को 108 सीट मिली है, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 सदस्यों की संख्या से 10 कम थी।

शह-मात का सियासी खेल

यहीं से शुरू होता है शह-मात का सियासी खेल। विजय के पिता चंद्रशेखर ने चुनाव पूर्व ही कांग्रेस के साथ गठबंधन की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन कांग्रेस अपने पुराने सहयोगी डीएमके के साथ ही चुनाव लड़ी। इस चुनाव में तमिलनाडु की जनता ने डीएमके की सत्ता को नकार दिया और कांग्रेस के हिस्से में महज पांच सीटें आईं। विजय को एक बात अच्छी तरह से पता थी कि उन्होंने डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ चुनावी अभियान चलाया था। इसलिए उनको सरकार बनाने के लिए छोटी पार्टियों की जरूरत है।

चुनाव बाद विजय को मिला कांग्रेस को साथ

चुनावी परिणाम सामने आने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विजय को फोन कर सबसे बड़ी पार्टी बनने की बधाई दी। इसके बाद, विजय ने कांग्रेस से समर्थन मांगा और उन्हें कांग्रेस ने अपना समर्थन दे भी दिया। कांग्रेस की पांच सीटें मिलाकर भी विजय सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थे। उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विजय को सहारा दिया और उनके 'संकटमोचक' बने।

Congress Vijay Alliance

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डीएमके-एआईएडीएमके की कोशिशों पर फिरा पानी

तमिलनाडु में ऐसी संभावना जताई जाने लगी कि डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर राज्य में सरकार बना सकती हैं। इस दौरान, सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई कि अगर डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करती है तो टीवीके के सभी 108 विधायक इस्तीफा देंगे। इस खबर ने सियासी भूचाल खड़ा कर दिया। दूसरी ओर, विजय को वामदलों की ओर से अच्छे संकेत नहीं मिल पा रहे थे। विजय ने वामदलों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने अगले दिन फैसला करने की बात कह दी।

विजय को मिला खरगे का सहारा

इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक अपील सामने आई जिसमें उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) महासचिव डी राजा से तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने की अपील की। समाचार एजेंसी भाषा के सूत्रों ने बताया कि खरगे ने गुरुवार को डी राजा से फोन पर बात की और उनसे विजय को समर्थन देने का अनुरोध किया ताकि भाजपा को पिछले दरवाजे से सत्ता हासिल करने का मौका न मिले। खरगे के हस्तक्षेप के बाद तमिलनाडु में छाए काले सियासी बादल छटने लगे। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि विजय के शपथग्रहण समारोह में राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं।

मंत्रिमंडल में नहीं होंगे वामदल

वामदल ने शुक्रवार को विजय को अपना समर्थन देने का फैसला किया। डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल दोनों वामपंथी दलों माकपा और भाकपा ने टीवीके को अपना समर्थन देने का फैसला किया है। वामदलों ने कहा कि यह निर्णय महज भाजपा को राज्य में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने से रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्य के अधिकारों की लड़ाई में वह डीएमके के साथ बने रहेंगे। वामदलों ने ऐलान किया कि वह टीवीके मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे।

भाकपा के प्रदेश सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा, ''जनता ने लोकतंत्र का प्रस्ताव रखा है और हमने इसका समर्थन किया है, और इसी के अनुरूप पार्टी टीवीके को अपना समर्थन देती है।'' वहीं, माकपा के प्रदेश सचिव पी. शनमुगम ने कहा कि राज्य के अधिकारों की रक्षा और इसी तरह के मुद्दों के संबंध में, वामपंथी दल द्रमुक के साथ गठबंधन जारी रखेंगे।

TVK को मिला जादुई आंकड़ा

108 सीटों के साथ तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके को कांग्रेस के पांच, माकपा और भाकपा के दो-दो और वीसीके के दो विधायकों का समर्थन मिला। जिसके बाद टीवीके ने सफलतापूर्वक बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता क्लियर हो गया।

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