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लोकसभा चुनाव के बीच हरियाणा से बुरी खबर, विधायक राकेश दौलताबाद की हार्ट अटैक से मौत

Haryana Independent MLA Rakesh Daultabad Passed Away: गुरुग्राम की बादशाहपुर विधानसा सीट से विधायक राकेश दौलताबाद का निधन हो गया है। शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे राकेश दौलताबाद को हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी मनीष यादव को हराया था।

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हरियाणा के निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद का निधन

Photo : Twitter

Haryana Independent MLA Rakesh Daultabad Passed Away: लोकसभा चुनाव के बीच हरियाणा से बुरी खबर सामने आई है। यहां गुरुग्राम की बादशाहपुर विधानसा सीट से विधायक राकेश दौलताबाद का निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे राकेश दौलताबाद को हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें, राकेश दौलताबाद 2019 के विधानसभा चुनाव में बादशाहपुर सीट से निर्दलीय चुनाव जीते थे, उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी मनीष यादव को हराया था।

जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम की बादशाहपुर सीट से राकेश दौलताबाद तीन बार विधायकी का चुनाव लड़ चुके थे। उन्होंने पहले भी निर्दलीय ओर इंडियन नेशनल लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, तीसरी बार में उन्हें जीत मिली। दौलताबाद के दो बच्चे हैं। दो साल पहले कोरोना के कारण उनके छोटे भाई की मौत हो गई थी। राकेश दौलताबाद हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके थे।

बीजेपी को दिया था समर्थन

2019 में निर्दलीय चुनाव जीतकर राकेश दौलताबाद ने विधानसभा में बीजेपी को समर्थन दिया था। हरियाणा में सत्ता परिवर्तन के बाद भी उन्होंने बीजेपी को अपना समर्थन जारी रखा। विधायक राकेश दौलताबाद की निधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शोक जताया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उन्होंने लिखा, 'बादशाहपुर के विधायक और विधानसभा में प्रमुख सहयोगी रहे राकेश दौलताबाद जी के आकस्मिक निधन से आहत और स्तब्ध हूं।राकेश जी के अचानक चले जाने से हरियाणा की राजनीति में एक शून्यता आई है। ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें।परिवारजनों और समर्थकों को दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।ॐ शांति! वहीं, गुरुग्राम लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर ने भी शोक व्यक्त करते हुए लिखा, 'स्तब्ध हूं और बेहद दुःखी। उनका हंसता मुस्कुराता चेहरा मेरी आंख के आगे से नहीं हट रहा। गुड़गांव के बादशाहपुर से विधायक राकेश दौलताबाद जी के निधन की ख़बर ने झकझोर दिया है। परिवार को कैसे हौसला दूं। ये सब अचानक कैसे हो गया। मैं प्रार्थना कर रहा हूं। ईश्वर परिजनों को संबल दें।'

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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