अयोध्या राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Row) की खबरें इन दिनों सुर्खियों में हैं। इस मामले में कल यानी गुरुवार 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और आज 26 जून को 8 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। कथित चंदा चोरी मामले ने भले ही जून महीने में तूल पकड़ा हो, लेकिन इसको लेकर शक पिछले महीने यानी मई में ही पैदा हो गया था। चलिए जानते हैं आखिर कैसे और क्यों शक हुआ और फिर यह मामला कैसे आगे बढ़ा?
कैसे हुआ चंदा चोरी का शक?
मई के आखिरी हफ्ते में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो चोरी का शक पैदा हुआ। दरअसल एक दान पेटी में 6 से 7 लाख रुपये एक बार में जमा होते थे। लेकिन कुछ हफ्ते के क्रम में 500 की गड्डी में कमी सामने आई।
नोट गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरा लगाया गया
जब मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का चंदा चोरी का शक गहराया तो उन्होंने नोट गिनने वाले कमरे में सबसे छिपाकर कुछ कैमरे लगा दिए। इन छिपे हुए कैमरे में एक हफ्ते की फुटेज देखी गई तो चोरी का शक और भी गहरा गया। वीडियो में देखा गया कि नोट प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे। इसके बाद दूसरा साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में से नोट चोरी कर अपने कपड़ों में छुपा लेते थे। हिडन कैमरे में उनकी यह कथित चोरी पकड़ में आ गई।
इस तरीके से करते थे चंदा चोरी
मिली जानकारी के मुताबिक कथित चंदा चोरी करने वाले कर्मचारी अलग तरीके से चंदे में सेंध लगाते थे। नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते थे। जब बैंक में जमा करने के लिए रकम गिनने की बारी आती तो गड्डी से एक-एक नोट गिनने की बजाय गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता था। फिर जब यह रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक ले जाई जाती तो उस दौरान हर गड्डी में जो अतिरिक्त नोट लगाए गए थे, उन्हें निकाल लिया जाता था। इस तरह से वाउचर से गड्डी की रकम का मिलान हो जाता और बिना शक के चंदा चोरी भी हो जाती थी।
मंदिर ट्रस्ट की लापरवाही पड़ी भारी!
राम मंदिर से कथित चंदा चोरी की यह घटना चिंताजनक तो है। लेकिन ड्यूटी से वापस जाते समय किसी भी कर्मचारी की तलाशी न लेना और भी घोर लापरवाही है। इसी लापरवाही का नतीजा था कि जिन कमरे में दान पेटियां खुलती थीं, नोटों की छंटाई होती थी और गड्डियां बनती थीं... वहां से धीरे-धीरे कर्मचारी कथित तौर पर चोरी करने लगे।
लव-कुश मिश्रा के घर से 10 लाख रुपये बरामद
आरोपी अनुकल्प मिश्रा चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा था। आरोपों के अनुसार अनुकल्प अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए हेरा फेरी को अंजाम देता था। इस मामले का खुलासा होने के बाद लव कुश मिश्रा के ही घर से पुलिस ने लगभग 10 लाख रुपये बरामद किए थे।
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नोट गिनने वाले कर्मचारी किसी न किसी के परिचित थे
नोट गिनने की प्रक्रिया से जुड़े सभी कर्मचारी किसी न किसी के परिचित थे, किसी न किसी की सिफारिश से काम करते थे। जैसे रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव एडमिनिस्ट्रेटर था। इन्हीं टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगा दिया था। इसी तरह से सालों से यहां काम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा को लगवा दिया था।
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जेवर भी किए जाते थे चोरी
श्रद्धा स्वरूप कई श्रद्धालु राम मंदिर की दानपेटी में जेवरात भी दान करते थे। दान चोरी करने वाले लोग बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप राम लला के कंगन, पैजनियां जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे। यह लोग पहले चोरी को अंजाम देते और फिर उसके बाद नोटों की गिनती और दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा-पढ़ी करते थे। राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो नियमित रूप से राम मंदिर ट्रस्ट के उस कमरे में आते-जाते थे, जहां दान पेटियां खुलती थीं।
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अपने बैंक खाते में जमा कि चढ़ावा चोरी की रकम
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार पकड़े गए अविनाश पांडे ने कथित चंदा चोरी के बाद रकम को अपने बैंक खाते में जा कर दिया। जिस तारीख को अविनाश ने चढ़ावा की रकम से कथित चोरी की, उसी तारीख को रकम अपने बैंक खाते में जमा करवाई। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने पूछताछ के दौरान मिलान कराया गया तो पुष्टि हुई कि चढ़ावा चोरी से जमा की गई रकम का एक हिस्सा अविनाश के खाते में जमा हो रही थी।