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इन सवर्णों को मिलेगा नौकरी-शिक्षा में आरक्षण,जनरल की मेरिट पर दिखेगा असर ! बदलेगी राजनीति

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 7, 2022, 01:56 PM IST

Supreme Court Gives Nod To EWS Reservation:5 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ में से 3 ने EWS आरक्षण के सरकार के फैसले को संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन नहीं माना है। यानी देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण नौकरी और शिक्षा क्षेत्र में जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए बड़ा बूस्ट है।

KEY HIGHLIGHTS
  • आर्थिक आधार पर आरक्षण का मुद्दा विपक्ष उठा सकता है।
  • मोदी सरकार के लिए सवर्ण वोट बैंक को मजबूती से बनाए रखना आसान होगा।
  • देश के 10 फीसदी वेतन भोगी 25000 रूपये की आय करते हैं।

Supreme Court Gives Nod To EWS Reservation:साल 2019 के लोक सभा चुनाव के कुछ महीने पहले जब जनवरी में मोदी सरकार ने सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक संसद से पारित कराया था। तो उसी वक्त यह तय हो गया था, कि मोदी सरकार ने बड़ा दांव चल दिया है, जिस पर राजनीति दलों से लेकर कानूनविद सवाल उठाएंगे। अब करीब 46 महीने बाद उसकी संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के फैसले के साथ मुहर लगा दी है।

5 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ में से 3 ने EWS आरक्षण के सरकार के फैसले को संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन नहीं माना है। यानी देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण नौकरी और शिक्षा क्षेत्र में जारी रहेगा। ऐसे में इस फैसले से किसे फायदा मिलेगा और कौन उसके लिए पात्र है, यह पहला सवाल है। दूसरा सवाल है कि इस फैसले से मेरिट सिस्टम में क्या बदलाव आएगा और जनरल कैटेगरी की कट ऑफ लिस्ट पर किस तरह का असर होगा। तीसरा सबसे अहम सवाल है कि इस फैसले का भारत की आरक्षण राजनीति पर क्या असर होगा?

किसे मिलेगा फायदा

चूंकि यह आरक्षण जाति के आधार पर नहीं है। ऐसे में EWS कोटा के तहत 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान सभी धर्मों के गरीब तबके को मिलेगा। इसमें हिंदू के अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख आदि भी शामिल होंगे। आरक्षण का पैमाना सामान्य वर्ग के परिवार की आय से तय होगा। इसमें ऐसे परिवार जिनकी सालाना आय 8 लाख लाख रुपये से कम है, उन्हें 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसमें वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशे आदि से हुई आय को शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा EWS के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए, परिवार के पास 5 एकड़ या उससे अधिक साइज की कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। इसी तरह परिवार के पास 1000 वर्ग फुट या उससे अधिक के आवासीय फ्लैट का मालिकाना हक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा किसी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में 100 गज से ज्यादा जमीन नहीं होनी चाहिए। जबकि गैर म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में 200 गज से ज्यादा जमीन नहीं होनी चाहिए। सरकार ने 124 वें संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू किया था।

जनरल कैटेगरी की मेरिट पर क्या होगा असर

इस फैसले का मतलब यह है कि देश में अब जनरल कैटेगरी के तहत 10 फीसदी हिस्सा आरक्षण के तहत इस्तेमाल होगा। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी कैटेगरी के लोग नहीं शामिल होंगे। इसके पीछे तर्क यह है कि उन्हें पहले से ही आरक्षण प्राप्त है। यानी EWS कोटा बचे 50 फीसदी में लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब बिना आरक्षण वाली कैटेगरी के लिए 40 फीसदी ही स्थान उपलब्ध होगा। क्योंकि अब 10 फीसदी EWS कोटे के लिए जनरल कैटेगरी का एक बड़ा वर्ग आवेदन करेगा। इसका असर कट ऑफ, ऊंची होने के रूप में दिख सकता है।

पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद की मई 2022 में आई रिपोर्ट के अनुसार देश में जिन लोगों की सालाना वेतन 3 लाख रुपये हैं, वह देश के टॉप-10 आय वाले वर्ग में आते हैं। इसके आधार पर सामान्य वर्ग की एक बड़ी आबादी आरक्षण के दायरे में आ जाएगी।

भाजपा को राजनीतिक फायदा !

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से भाजपा को सवर्णों के अंदर एक बड़े वर्ग की तरफ से आरक्षण की मांग का सामना करना पड़ा है। इसमें कई राज्यों में जाट आंदोलन, मराठा आंदोलन सत्ताधारी दल और सरकार के लिए चुनौती बने थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद वह ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ सहित दूसरे सवर्ण जातियों का साथ मजबूती से बनाई रख सकेगी। इसके अलावा 2024 के लोक सभा चुनाव को देखते हुए भाजपा खास तौर से गरीब मुस्लिम तबके को अपने साथ जोड़ना चाह रही है। ऐसे में EWS कोटे के तहत 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण का दांव, उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

विपक्ष SC,ST, OBC के लिए बना सकता है मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले यह तो साफ हो गया है कि 50 फीसदी कोटे बाहर 10 फीसदी आरक्षण देना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन नहीं है। लेकिन EWS कोट के तहत केवल सवर्ण वर्ग और दूसरे धर्मों के लोगों को ही लाभ मिलेगा। इसे देखते हुए, SC,ST, OBC वर्ग की तरफ से इस बात की मांग उठ सकती है कि उनके समुदाय को आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए। और इसके लिए उन्हें विपक्ष का साथ मिल सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव

आरक्षण से पहले से जारी व्यवस्था पर असर नहीं हो, इसलिए साल 2019 में कानून आने के बाद सरकार ने कहा था कि देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 10 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएगी, जिससे नई व्यवस्था का मौजूदा सीटों पर असर नहीं पड़े। हालांकि इसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के साथ-साथ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ानी होगी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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