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आजम खान पर ED का एक्शन, जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय अनियमितता मामले में भष्टाचार का केस दर्ज

जांच एजेंसी का आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में करीब 494 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए थे, जिसमें सरकारी ठेकों के कमीशन और संदिग्ध चंदे के पैसों का इस्तेमाल किया गया था। जानकारी के मुताबिक खान 494 करोड़ का हिसाब किताब नही दे पाए।

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जेल में बंद हैं आजम खान।

Photo : PTI

Azam Khan: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में नई FIR दर्ज कराई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सपा नेता के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

खान पर गबन और धोखाधड़ी करने आरोप

आजम खान पर मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस एंड एस एंटरप्राइजेज, एस एस एसोसिएट और अन्य के खिलाफ सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी करने आरोप है। मंगलवार को ED की टीम ने रामपुर जिला जेल जाकर आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से करीब 8 से 9 घंटे तक पूछताछ की थी।

494 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए थे

जांच एजेंसी का आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में करीब 494 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए थे, जिसमें सरकारी ठेकों के कमीशन और संदिग्ध चंदे के पैसों का इस्तेमाल किया गया था। जानकारी के मुताबिक खान 494 करोड़ का हिसाब किताब नही दे पाए जिसके बाद लखनऊ आफिस ED के डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस थोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

खर्च को लेकर बड़ा अंतर सामने आने का दावा

ED की जांच में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण पर खर्च को लेकर बड़ा अंतर सामने आने का दावा। ED के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों के निर्माण की अनुमानित लागत 494.46 करोड़ रुपये बताई गई। वहीं, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया गया। ED के अनुसार, निर्माण लागत और घोषित खर्च के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है।

दान की वास्तविकता पर भी सवाल

जांच में आरोप है कि सरकारी ठेकों से जुड़े निर्माण सामग्री और सरकारी धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण में किया गया। ED की शिकायत के मुताबिक, ठेकेदारों के जरिए करीब 55.8 करोड़ रुपये, सरकारी कार्यों के जरिए 23.41 करोड़ रुपये और विधायक/विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए। ED ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं। FIR में आजम खान, जौहर ट्रस्ट, ठेकेदारों और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की जांच की जाएगी।

जांच के दायरे में ट्रस्ट के पैसे का स्रोत

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि ट्रस्ट को अलग-अलग स्रोतों से कितना धन मिला, रकम किन माध्यमों से आई और उसका इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया।

लंबे समय से जेल में बंद हैं आजम

रामपुर सदर सीट से 10 बार विधायक रह चुके आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे असरदार और बड़े मुस्लिम चेहरों में से एक रहे हैं। वे एक फर्जीवाड़े के मामले में सजा मिलने के बाद से ही जेल में बंद हैं। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अधिकारियों के खिलाफ दिए गए विवादित बयान के मामले में भी उन्हें दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है। ईडी अब इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और सबूतों को मजबूत करने में जुटी है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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