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मेडिकल सीटों का काला कारोबार – नकली NRI सर्टिफिकेट से निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराने वाला गिरोह बेनकाब, ED की बड़ी कार्यवाई।

ईडी (Enforcement Directorate) ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में जबरदस्त फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि कॉलेज प्रबंधन और एजेंट्स मिलकर फर्जी NRI सर्टिफिकेट और कागज़ तैयार करके ऐसे छात्रों को NRI कोटे से एडमिशन दिलवा रहे थे, जो असल में इसके हकदार ही नहीं थे।

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मेडिकल सीटों का काला कारोबार – नकली NRI सर्टिफिकेट से निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराने वाला गिरोह बेनकाब, ED की बड़ी कार्यवाई।

नई दिल्ली: ईडी (Enforcement Directorate) ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में जबरदस्त फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि कॉलेज प्रबंधन और एजेंट्स मिलकर फर्जी NRI सर्टिफिकेट और कागज़ तैयार करके ऐसे छात्रों को NRI कोटे से एडमिशन दिलवा रहे थे, जो असल में इसके हकदार ही नहीं थे।

ईडी ने मेडिकल कॉलेजों और एजेंट्स के ठिकानों पर छापेमारी की। वहां से फर्जी NRI सर्टिफिकेट, नकली नोटरी स्टैम्प और जाली कागज़ात बरामद हुए।दरअसल भारतीय दूतावासों से जांच कराने पर कई NRI सर्टिफिकेट नकली पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि एजेंट्स पैसे लेकर फर्जी फैमिली ट्री बनाते थे, ताकि ऐसे लोग भी NRI कोटे से सीट ले सकें जिनका असल में कोई रिश्ता नहीं था। कई बार एक ही NRI के कागज़ों का इस्तेमाल कई छात्रों को दाखिला दिलाने के लिए किया गया।

नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था

नियम के मुताबिक फीस NRI स्पॉन्सर को भरनी चाहिए थी, लेकिन ज्यादातर मामलों में छात्र का परिवार ही पैसे भर रहा था। कई एफिडेविट्स पर NRI स्पॉन्सर की फर्जी सिग्नेचर और जाली दस्तखत भी मिले। ईडी की इस जांच के बाद केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब सिर्फ करीबी रिश्तेदार (फर्स्ट डिग्री और सेकंड डिग्री वाले) ही NRI कोटे में स्पॉन्सर बन सकेंगे। विदेश मंत्रालय ने नए गाइडलाइंस जारी किए हैं, ताकि फर्जी सर्टिफिकेट बनाना मुश्किल हो।

एम्बेसी सर्टिफिकेट को विदेश मंत्रालय से वेरिफाई कराया जाएगा: MCC

MCC ने साफ कर दिया है कि अब एम्बेसी सर्टिफिकेट को विदेश मंत्रालय से वेरिफाई कराया जाएगा। अगर कोई सर्टिफिकेट नकली निकला तो छात्र का एडमिशन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और कॉलेज पर भी कार्रवाई होगी।ऐसे में ईडी की इस कार्यवाई के बाद अब सिर्फ असली NRI छात्र ही इस कोटे का फायदा उठा पाएंगे। जो सीटें खाली रहेंगी, वो मैनेजमेंट कोटे में जाएंगी, जिससे मेरिट वाले छात्रों को मौके मिलेंगे। NRI कोटा सिर्फ मेडिकल कॉलेजों में ही नहीं, बल्कि MBA, लॉ और कई यूनिवर्सिटीज़ में भी लागू है। ऐसे में यह कार्रवाई पूरे एजुकेशन सिस्टम को पारदर्शी बनाने में मदद करेगी।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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